अंडमान के आदिवासी : सेंटिनेलिसों ने की अमेरिकी धर्म उपदेशक की हत्या, मगर ये हैं दुनिया के हर कानून से ऊपर !

अमेरिकी नागरिक 27 वर्षीय जान एलन चाऊ की हत्या भारत के उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर संरक्षित सेंटिनल आदिवासियों द्वारा किए जाने के बाद हिन्द महासागर में स्थित अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह इन दिनों दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब एक महीना गुजरने के बाद भी पुलिस चाऊ का शव बरामद करने में सफल नहीं हुई है।

17 नवंबर को हुई हत्या में भारतीय पुलिस ने उन सात मछुआरों (नाविकों) को गिरफ्तार किया है, जो चाऊ को दुनिया के एक सबसे खूबसूरत द्वीप उत्तरी सेंटिनल पर अपने नाव से ले गए थे।
पृथ्वी पर जीवित बची रह गई पाषाण युग की जीवाश्म है यह जनजाति

हालांकि पुलिस ने सेंटिनेलिस जनजाति के अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है, मगर इस समुदाय के लोगों पर हत्या या अपराध का किसी तरह की कार्रवाई नहींहोगी, क्योंकि दुनिया की इस लुप्तप्राय जनजाति का द्वीप दुनिया के किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए प्रवेश वर्जित है और संरक्षित विश्व धरोहर घोषित है। अंडमान के द्वीप पर यह अति प्राचीन जनजाति मानव सभ्यता के पाषाण युग की बची रह गई अति दुर्लभ जीवित जीवाश्म है।

मूल आदिवासी संरक्षण अनियम 1956 और भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत उत्तरी सेंटिनल द्वीप में जाना प्रतिबंधित है। इसलिए कि वर्जित है कि आधुनिक सभ्य संसार की संक्रामक बीमारी के वह शिकार नहींहो जाएं और उंगली गिनी जाने वाली संख्या में बची रह गई यह आदिम जनजाति कहींपृथ्वी से लुप्त ने हो जाए।
लुप्त होने के कगार पर आदिम जनजाति, जिनकी भाषा-जीवनशैली की जानकारी बाहरी दुनिया को नहीं

लुप्त होने के एकदम कगार पर खड़ा पृथ्वी का यह सबसे प्राचीन मानवसमूह (सेंटिनेलिस समुदाय) बाहरी दुनिया के लोगों से संपर्क पसंद नहीं करता। अभी तक इस समुदाय की भाषा, जीवनशैली और अन्य सामूहिक-सामाजिक चीजें आधुनिक समाज की समझ से बाहर हैं। इस समुदाय के लोग आज भी पाषण काल की तरह पूरी तरह नंग-धड़ंग प्राकृतिक अवस्था में घने जंगल में रहते हैं और भाला, बरछा, तीर से मछली, कछुआ, भालू, सूअर का शिकार कर अपना भोजन जुटाते हैं। सेन्टीनेलिस आदिवासी एशिया की सबसे अंतिम श्रेणी की अनछूई जनजाती है, जो इस द्वीप पर बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटी हुई साठ हजार सालों से रह रही है। यह अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के भी अन्य जनजातियों के भी संपर्क में नहींहै। 2011 में हेलीकाप्टर से की गई जनगणना में इस द्वीप पर सेंटिनलिस जनजाति की छोटी ऊंचाई वाली दस झोपडिय़ां में 12 पुरुष और तीन महिलाएं ही दिखी थीं। अनुमान है कि यह आदिम जनजाति सौ से भी कम संख्या में बची हुई है।
सफल नहीं रहा धार्मिक उपदेशक जान चाऊ का विश्व इतिहास में रोमांचक धर्म-प्रवर्तन-संस्थापन का अभियान

पुलिस का कहना है, जैसाकि मछुआरों ने बताया है, अमेरिकी नागरिक चाऊ कई बार सेंटिनल द्वीप पर जा चुका था और संभवत: सेंटिनेलिस समदुाय के लोगों से मिल भी चुका था। मगर 17 नवम्बर को चाऊ ने जैसे ही द्वीप में कदम रखा, सेंटिनेलिस समुदाय ने उन पर तीर-कमान से हमला कर दिया गया। आदिवासी चाऊ के शव को रस्सी में बांधकर घसीटते हुए समुद्र तट तक ले गए और शव को रेत पर फेेंक दिया। मछुआरों ने अंडमान-निकोबार की राजधानी पोर्टब्लेयर पहुंचकर चाऊ के दोस्त उपदेशक एलेक्स को घटना की जानकारी दी। एलेक्स ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास को इसकी सूचना दी, तब दूतावास के जरिये चाऊ के घर मृत्यु का संदेश पहुंचाा। अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों की शिकायत पर मछुआरों को गिरफ्तार किया गया। एलेक्स ने पुलिस को बताया है कि अल्बामा (अमेरिका) निवासी उपदेशक चाऊ कई बार अंडमान आ चुके थे और विश्व इतिहास में सेंटिनेलिस समुदाय का रोमांचक धर्म-प्रवर्तन-संस्थापन के अभिायन पर थे, क्योंकि यह आदिम जनजाति अभी तक सभ्य दुनिया के संपर्क में नहींआई है और शायद आधुनिक समाज की तरह उनका कोई संस्थागत धर्म नहीं है।
नृविज्ञानी समझने की कोशिश कर रहे है, आखिर क्यों करते हैं ये बाहरी लोगों पर हमला ?

अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह की राजधानी पोर्टब्लेयर से 50 किलोमीटर दूर हिन्द महासागर में स्थित दुनिया के एक सबसे खूबसूरत द्वीप उत्तरी सेंटीनेलिस  पर पुलिस हेलीकाप्टर से गई, मगर सेंटिनेलिस समुदाय का आक्रामक रुख देखकर द्वीप पर हेलीकाप्टर नहीं उतार सकी। सेन्टीनेलिस समुदाय के लोग सागर तट पर आकाश की ओर तीर-धनुष तानकर खड़े थे। समुद्र में नाव से भी पुलिस ने द्वीप पर जाने की कोशिश की, पर 400 मीटर दूर से ही तीर-धनुष से लैस आदिम आदिवासियों को देखकर लौट गई।

नृविज्ञानशास्त्री और वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ये बाहरी लोगों पर हमला क्यों करते हैं? पुलिस मानवविज्ञानियों से सलाह ले रही है कि इन आदिम आदिवासियों से कैसे मित्रता की जा सकती है?
समुद्री तूफान सुनामी के समय मदद लेने के बजाय तीर चलाने लगे थे सेंटिलेनिस
वर्ष 2004 में आए समुद्री तूफान (सुनामी) के समय भारत सरकार की ओर से इन आदिवासियों की सहायता के लिए इंडियन कोस्टगार्ड के हेलीकाप्टर सेन्टीनेलिस द्वीप पर भेजे गए थे, लेकिन आदिवासियों ने मदद लेने की बजाए हेलीकाप्टर पर तीर चलाना शुरू कर दिया था। अमेरिकी धार्मिक उपदेशक जान चाऊ की हत्या से पहले वर्ष 2006 में भी इन आदिवासियों ने दो मछुआरों की हत्या की थी, जिसकी केसस्टडी भी की जा रही है।

(आगे भी जारी)

(विशेष रिपोर्ट : कृष्ण किसलय, तस्वीर संयोजन : निशांत राज)

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