पुलिस ट्रेंड : रेप पर मोड साइलेंट, अपशब्द पर एक्शन अरेस्ट

पटना/गया/डेहरी-आन-सोन (बिहार)-विशेष प्रतिनिधि। पुलिस के एक्शन का ट्रेंड कैसा होता जा रहा है, यह जानने-समझने के लिए कई ताजे उदाहरण सामने हैं। रेप (बलात्कार) के मामले में थाना पुलिस आरोपी को जेल भेजने के मामले में तुरंत एक्शन में आने के बजाय खामोशी अख्तियार करती है और उसकी खामोशी महीने भर तक बनी रहती है। जबकि अपशब्द बोलने के मामले में तुरंत एक्शन में आती है और आरोपी को फौरन गिरफ्तार कर सीधे जेल भेज देती है। पुलिस मुफ्त में रोज सब्जी नहीं देने पर चोरी करने, असलहा रखने का आरोप लगाकर एक नाबालिग को जेल भेजने का षड्यंत्र करती है तो आधिपत्य मानने से इनकार करने पर दूसरे नाबालिग को रात भर हाजत में बंद कर प्रताडि़त करने का लुत्फ उठाती है।

गुरुभाई पर एक्शन में आने से अनिच्छुक रही थाना पुलिस

रोहतास जिला के डालमियानगर थाना क्षेत्र अंतर्गत रोहतास उद्योगसमूह के आवासीय परिसर स्थित एक घर में घुसकर रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) का एक जवान (सिपाही) पिस्तौल की नोक पर महिला से बलात्कार (रेप) करता है और महिला के दो-दो बार बयान के बावजूद पुलिस की कार्रवाई साइलेंट मोड में रहती है। इस मामले में थाना पुलिस की शिथिलता पर जब समाज संगठित होता है, तब अंतत: आरोपी सिपाही कोर्ट में आत्मसमर्पण करना पड़ता है। जाहिर है कि थाना पुलिस अपने गुरुभाई पर एक्शन में आने से अनिच्छुक रही है, भले ही पुलिस के वरिष्ठ पदाधिकारी जन-दबाव में यह कहते रहे कि दुष्कर्म के आरोपी सिपाही को गिरफ्तार किया जाएगा।

बलात्कार का कांड चार जून की दोपहर का है। डालमियानगर थाना में दर्ज कांड (संख्या 524/18, भारतीय दंड विधान की धारा 376, 511, 307, 452 व 354) की पीडि़ता के बयान के अनुसार, महिला अपने घर (कंपनी क्वार्टर) में सो रही थी। उस क्षेत्र में रेल संपत्ति (डालमियानगर कारखाना) की रखवाली के लिए तैनात सिपाही उसके घर में घुस आया और उसका मुंह दबाकर और अपनी पिस्तौल दिखाकर उसे चिल्लाने, शोर मचाने से रोका और बलात्कर करने के बाद धमकाते हुए निकल गया। महिला ने उसी दिन डालमियानगर पुलिस थाना में घटना की रिपोर्ट लिखाई। हालांकि महिला ने पुलिस में दिए गए अपने पहले बयान में दुष्कर्म करने की बात नहीं बताई थी, मगर सिपाही द्वारा शरीर पर नोंच-खसोट करने के निशान दिखाए थे। पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया, मगर एक्शन में नहीं आई।

एसपी ने महिला पुलिस की अधिकारी को बयान लेने भेजा, फिर भी पुलिस रही खामोश

इस बीच अखबारों में पुलिस में दर्ज कांड के आधार पर महिला का गला दबाने और दुष्कर्म का प्रयास करने की खबर प्रकाशित हुई। चार दिन बाद महिला ने नौ जून को एसपी को फोन कर आपबीती बताईा। एसपी सत्यवीर सिंह ने तुरंत एक्शन लिया और महिला थाना पुलिस की अधिकारी और डालमियानगर पुलिस पोस्ट के प्रभारी को फिर से महिला का बयान लेने का निर्देश दिया। इस बार महिला ने बताया कि उसके साथ सिपाही ने बलात्कार (दुष्कर्म) भी किया था। इस बयान पर भी पुलिस खामोश बनी रही।

आरोपी सिपाही ने किया कोर्ट में आत्मसमर्पण
थाना पुलिस की खामोशी के मद्देनजर कायस्थ महासभा के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार सिन्हा (अधिवक्ता) के नेतृत्वव में प्रतिनिधि मंडल ने एसपी, डीएसपी को ज्ञापन देकर आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की। 28 जून को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अनवर जावेद अंसारी ने संवाददाताओं द्वारा पूछे जाने पर बताया कि आरोपी की गिरफ्तरी का आदेश 28 जून को हो दिया गया है। आरोपी फिर भी गिरफ्तार नहीं हो सका। तब 2 जुलाई को रोहतास उद्योगसमूह के कर्मचारी नेता गिरिजानंदन सिंह की अध्यक्षता में डालमियानगर में सभा कर सामूहिक आक्रोश व्यक्त किया गया और आंदोलन करने का फैसला लिया गया। तब भी पुलिस को आरोपी सिपाही को गिरफ्तार करने का श्रेय हासिल नहीं हुआ। आरोपी ने 7 जुलाई को अनुमंडल कोर्ट में आत्मसमर्पण किया और कोर्ट ने कानून के मद्देनजर उसे जेल भेजने का आदेश दिया।

मोबाइल फोन के आधार पर युवक को खोजकर गिरफ्तारी
डालमियानगर की इस घटना से करीब दो हफ्ता पहले अपशब्द बोलने के आरोप में रोहतास जिला पुलिस ने 16 मई को युवक संतोष राम (ग्राम बसडीहा) को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अंचलाधिकारी अनुज कुमार ने पुलिस में यह शिकायत दर्ज कराई थी कि संतोष राम 13 मई की रात करीब 11 बजे तक उन्हें फोन कर परेशान करता रहा था। वह फोन काट देने के बावजूद फिर फोन करता था। थानाध्यक्ष सुनील कुमार जायसवाल के अनुसार, पुलिस एक्शन में आई और मोबाइल लोकेशन व मोबाइल फोन के डिटेल्स के आधार पर युवक को खोजकर गिरफ्तारी की गई।

मानवाधिकार आयोग ने पुलिस को 50 हजार मुआवजा देने का  दिया आदेश
उधर, गया जिले के विष्णुपद पुलिस थाना में बिना किसी संज्ञेय अपराध के एक बालक को रात भर हाजत में बंद कर प्रताडि़त करने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने पीडि़त पक्ष को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। राशि के भुगतान के लिए आयोग ने बिहार पुलिस को एक माह का समय दिया है। विष्णुपद थाना क्षेत्र के घुंघरीटांड़ निवासी मोहम्मद शमीम ने आयोग में लिखित शिकायत दर्ज कराई कि उसके नाबालिग बेटे को थाने के छोटा बाबू ने ही हाजत में बंद कर दिया और 10 हजार रुपये देने के बाद उसे मुक्त किया गया। वर्ष 2010 में इस पुलिस पोस्ट को छोटा बाबू ने उसे भी घर से उठाकर हाजत में बंद कर दिया था और 10 हजार रुपये देने पर ही उसे छोड़ा था। बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के प्रभारी अध्यक्ष (न्यायाधीश मंधाता सिंह) ने गया के एसएसपी से इस मामले की रिपोर्ट मांगी, मगर आयोग की ओर से कई रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद गया के एसएसपी ने अपनी रिपोर्ट आयोग को नहीं दी। तब आयोग ने यह मान लिया कि मोहम्मद शमीम का आरोप सही है।

नाबालिग सब्जी विक्रेता झूठे आरोप में गिरफ्तार, पुलिस रेड पार्टी निलंबित

इससे पहले बिहार की राजधानी पटना में भी एक नाबालिग सब्जी विक्रेता को चोरी करने, असलहा रखने के झूठे आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इस मामले में दो पुलिस इंस्पेक्टर और 9 सदस्यीय रेड पार्टी को निलंबित किया गया और राजधानी पटना के अगमकुआं पुलिस थाना (ओपी) के पूरे स्टाफ को जिला पुलिस लाइन भेजा गया। नाबालिग को बेउर जेल से रिमांड होम में शिफ्ट कर दिया गया है। इस मामले में विभागीय जांच का आदेश दिया गया और अनुसंधानकर्ता व पर्यवेक्षणकर्ता को कारण बताओ नोटिस दिया गया।

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