नाटक समाज का दर्पण है, बदलाव की चेतना जगाता है : उपेंद्र कुशवाहा

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)- निशांत राज। अभिनव कला संगम द्वारा आयोजित 34वीं अखिल भारतीय लघु नाट्य एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता का भव्य उद्घाटन शुक्रवार को ई. ललन सिंह स्पोर्टिंग क्लब परिसर में हुआ। प्रतियोगिता का उद्घाटन पूर्व केंद्रीय मंत्री सह राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा, स्थानीय विधायक राजीव रंजन सिंह, डॉ. उदय कुमार सिन्हा, डॉ. निर्मल कुमार कुशवाहा, डॉ. नवीन नटराज एवं ए. आर. वर्मा सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख एवं राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नाटक समाज का सजीव दर्पण होता है। नाट्य कला के माध्यम से रचनाकार समाज में व्याप्त कुरीतियों, विसंगतियों और समस्याओं पर प्रभावी प्रहार करते हैं। नाटक किसी भी भाषा में हो, उसका संदेश सदैव सकारात्मक होता है और समाज को सही दिशा देने का कार्य करता है।

उन्होंने कहा कि कालिदास जैसे महान रचनाकारों ने अपने समय की सामाजिक कुरीतियों को नाटकों के माध्यम से उजागर किया। अभिनव कला संगम के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि 34 वर्षों से निरंतर इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर के योगदान को स्मरण करते हुए नाट्य कला के संरक्षण और प्रोत्साहन की अपील की।

उन्होंने विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों का गर्मजोशी से स्वागत किया और शहरवासियों को नव वर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

स्थानीय विधायक राजीव रंजन उर्फ सोनू सिंह ने कहा कि डेहरी -आन-सोन में इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। उन्होंने कहा कि नाट्य प्रतियोगिताएं सामाजिक बुराइयों के खिलाफ प्रभावी संदेश देती हैं और समाज को जागरूक बनाती हैं। ऐसे आयोजनों से युवाओं की सोच प्रगतिशील होती है और विलुप्त होती नाट्य संस्कृति को नई ऊर्जा मिलती है।

अभिनव कला संगम के निदेशक संजय सिंह वाला ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि संगठन ने सामाजिक एवं सांस्कृतिक संरचना के निर्माण के लिए सतत प्रयास करते हुए 34 वर्षों की लंबी यात्रा तय की है। संस्था के अध्यक्ष संतोष सिंह एवं सचिव नंदन गुप्ता ने बताया कि प्रतियोगिता में देश के 17 राज्यों की 32 टीमें भाग ले रही हैं। यह आयोजन 26 दिसंबर से 30 दिसंबर तक प्रतिदिन संध्या में लघु नाट्य प्रतियोगिता के रूप में होगा, जबकि दिन में चित्रकला, गायन एवं नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

प्रतियोगिता के पहले दिन कुल पांच नाटकों का मंचन किया गया। हिंदी एवं भोजपुरी भाषा में प्रस्तुत नाटकों ने बहुभाषी रंगमंच की सशक्त झलक पेश की। प्रतियोगिता के दौरान जागरूक संस्थान, बलिया (उत्तर प्रदेश) द्वारा प्रस्तुत “बिदेसिया”, कलाक्षेत्र नाट्य मंच, जमशेरपुर (झारखंड) का “नाग मंडल”, समाजात्रिक, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) का “संपर्क”, स्वर संबलपुर (ओडिशा) की प्रस्तुति “कारूवाकी” तथा एंटीक इंडियंस, धनबाद (झारखंड) द्वारा मंचित “जादू का सूट” ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में मनोज अज्ञानी, उमा शंकर पांडेय, कपिल कुशवाहा, मनोज सिंह, चंद्रभूषण मनी, कपिल मुनि पांडेय, अनिल पाठक, अमित कुमार पटेल, अनुज कुशवाहा, बनारसी कुशवाहा, विनय बाबा, संजय सिंह, यश उपाध्याय, जीतू सिंह, पिंटू यादव, दिग्विजय सिंह, अरुण शर्मा, राज पटेल उर्फ बंटी, मुकेश कुमार सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी एवं दर्शक उपस्थित रहे।

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