कृषि अनुसंधान परिसर की तीन दिवसीय बैठक संपन्न, नीतियों पर की गई विस्तृत चर्चा

पटना- कार्यालय प्रतिनिधि। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में तीन दिवसीय संस्थान अनुसंधान परिषद की बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें संस्थान मुख्यालय; कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र, राँची; कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर और कृषि विज्ञान केंद्र, रामगढ़ के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। डॉ. अनुप दास ने इस बैठक में संस्थान एवं इसके केन्द्रों पर चल रही फसल अनुसंधान, भूमि एवं जल प्रबंधन, पशुधन एवं मात्स्यिकी प्रबंधन, सामाजिक-आर्थिक एवं प्रसार तथा पहाड़ी एवं पठारी क्षेत्रों में चल रहे अनुसंधान कार्यों की गहन समीक्षा की एवं इसमें सुधार के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिए।

डॉ. दास ने अपने संबोधन में एक टीम एक टास्क पर जोर देते हुए सभी वैज्ञानिकों को किसानों की उत्पादकता एवं आय बढ़ाने की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही संस्थान की सभी अनुसंधान परियोजनाओं को 8-10 मुख्य थीम जैसे आनुवंशिक सुधार, जलवायु अनुकूल खेती, डिजिटल कृषि, एग्री फूड सिस्टम आदि में रखकर कार्य करने का निर्देश दिया।

आज नई अनुसंधान परियोजनाओं की प्रस्तुति से पहले डॉ. ए. वेलमुरुगन, सहायक महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने अपने संबोधन में संस्थान द्वारा किए जा रहे अनुसंधान को कृषि की राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए चलाने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्होंने पूर्वी भारत के चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, कोयला खदान प्रभावित क्षेत्रों के पुनरुद्धार एवं छोटे एवं सीमांत किसानों की समस्याओं पर केंद्रित कार्य करने को कहा। इन नई परियोजनाओं का मुख्य विषय प्राकृतिक खेती, कटाई उपरांत प्रोद्योगिकी, हाई टेक बागवानी, मूल्य श्रृंखला विश्लेषण, छोटे किसानों के लिए फार्मिंग मॉडल आदि थे। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के निदेशक डॉ. बिकास दास ने अनुसंधान परियोजनाओं में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने संस्थान को नए कृषि क्षेत्र जैसे कार्बन क्रेडिट, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, जलवायु अनुकूल खेती, धान-परती भूमि प्रबंधन तथा सिस्टम अप्रोच में नई रिसर्च परियोजनाओं पर कार्य करने के लिए बधाई दी।

बैठक की शुरुआत डॉ. अभय कुमार, प्रभारी पीएमई प्रकोष्ठ के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने संस्थान में चल रही आतंरिक एवं बाह्य पोषित अनुसंधान परियोजनाओं की जानकारी दी। इस बैठक में पहली बार बिहार सरकार के प्रतिनिधि बामेती, पटना के निदेशक धनंजय पति त्रिपाठी, बिहार उद्योग संघ, पटना के अध्यक्ष केपीएस केशरी और वैशाली जिले के प्रगतिशील किसान संजीव कुमार ने महत्वपूर्ण हितधारकों के रूप में भाग लिया।

श्री त्रिपाठी ने संस्थान को बिहार के किसानों के लिए उन्नत फसल किस्मों एवं तकनीकों को विकसित करने एवं उपलब्ध प्रोद्योगिकियों को साझा करने का अनुरोध किया। उन्होंने संस्थान को फसल अनुसार उर्वरक की मात्रा के नए तरीके से मानकीकरण तथा कदन्न एवं दलहन फसलों पर कार्य करने की सलाह दी। श्री केशरी ने फल एवं सब्जियों की प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त किस्मों को विकसित करने पर जोर दिया। प्रगतिशील किसान संजीव कुमार ने संस्थान से सब्जियों के बीज उत्पादन पर सहभागिता का अनुरोध किया।

इस बैठक में 101 परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई और प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की गई, साथ ही अत्याधुनिक तकनीकों पर आधारित 06 नए परियोजनाओं की भी स्वीकृति दी गई। यह बैठक वैज्ञानिक संवाद, समीक्षा एवं भविष्य की दिशा तय करने हेतु एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई, जो पूर्वी भारत में कृषि विकास के लिए ठोस कदमों का आधार बनेगी। डॉ. शिवानी, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा धन्यावाद ज्ञापन के साथ बैठक का समापन हुआ |

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