
पटना /बेगूसराय। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत आईसीएआर-आरसीईआर, पटना द्वारा चौराही प्रखंड के एकम्बा गांव में गुरुवार को ‘वैज्ञानिक बत्तख पालन’ विषय पर किसान–वैज्ञानिक संवाद सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक खेती के साथ वैज्ञानिक बत्तख पालन को जोड़कर किसानों की आय में वृद्धि करना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना था।
कार्यक्रम में 50 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने भाग लेकर बत्तख पालन की आधुनिक तकनीकों के प्रति उत्साह दिखाया। संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि बत्तख पालन किसानों के लिए आय का सशक्त माध्यम होने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
डॉ. उज्ज्वल कुमार (प्रमुख, सामाजिक आर्थिक एवं प्रसार) ने बिहार में वैज्ञानिक बत्तख पालन की संभावनाओं और प्रभावी विपणन रणनीतियों पर चर्चा करते हुए बताया कि संगठित विपणन व्यवस्था से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रोहन कुमार रमण ने कम लागत में अधिक उत्पादन के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी। वहीं डॉ. विवेकानंद भारती ने आर्द्रभूमि क्षेत्रों में बत्तख–मत्स्य समेकित कृषि मॉडल की उपयोगिता समझाई। उन्होंने बताया कि बत्तखों का अपशिष्ट तालाब की उर्वरता बढ़ाता है, जिससे मत्स्य पालन की लागत घटती है।
कृषि विज्ञान केंद्र, बेगूसराय के पशु विशेषज्ञ डॉ. विपिन ने उपयुक्त शेड निर्माण और संतुलित आहार प्रबंधन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया और वैज्ञानिक पद्धति से बत्तख पालन शुरू करने का संकल्प लिया गया।
संस्थान ने विश्वास जताया कि ऐसे प्रयासों से बिहार में कृषि विविधीकरण को नई दिशा मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।





