
गयाजी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा मंगलवार को गयाजी जिले के खिजरसराय प्रखंड अंतर्गत ग्राम पचलाखा में “संतुलित उर्वरक उपयोग पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम” का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुल 44 किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के प्रति जागरूक करना था, ताकि फसल उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया। साथ ही मृदा उर्वरता बढ़ाने के लिए हरी खाद, विशेष रूप से ढैंचा के प्रयोग के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई। इसके अलावा सतत कृषि को बढ़ावा देने हेतु जैव उर्वरकों के उपयोग पर भी चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जबकि हरी खाद एवं जैव उर्वरकों के प्रयोग से मृदा की संरचना में सुधार, सूक्ष्मजीवों की सक्रियता में वृद्धि और दीर्घकालीन उर्वरता को बनाए रखने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए अपने अनुभव साझा किए और विभिन्न कृषि संबंधी समस्याओं पर विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त किया। इस पहल से किसानों में संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ी और टिकाऊ खेती की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने की प्रेरणा मिली।
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