पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण से स्वच्छ पर्यावरण, ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा की बचत को मिलेगा बल

पटना। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (E-20) को लेकर फैली विभिन्न भ्रांतियों को दूर करने के लिए तेल उद्योग की ओर से बिहार के राज्य स्तरीय समन्वयक (एसएलसी) ने सही तथ्यों और प्रामाणिक जानकारी साझा की है। तेल उद्योग का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा की बचत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

बताया गया कि एथेनॉल एक पौधों से प्राप्त एथाइल अल्कोहल है, जिसे पेट्रोल में मिलाकर स्वच्छ ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। एथेनॉल में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होने के कारण ईंधन का दहन अधिक प्रभावी होता है। इससे वाहनों से निकलने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन तथा सूक्ष्म कणों (पार्टिकुलेट मैटर) के उत्सर्जन में कमी आती है। परिणामस्वरूप वायु प्रदूषण घटता है और शहरी क्षेत्रों में स्मॉग की समस्या कम होने के साथ जनस्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

तेल उद्योग के अनुसार, एथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक होती है। इसके कारण इंजन की एंटी-नॉक क्षमता बढ़ती है और आधुनिक हाई-कम्प्रेशन इंजन अधिक दक्षता के साथ कार्य करते हैं। इससे वाहन की गति, त्वरण (एक्सीलरेशन) और समग्र प्रदर्शन में भी सुधार होता है।

एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण लाभ ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है। घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल के उपयोग से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर सीमित होता है और देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

आर्थिक दृष्टि से भी यह पहल लाभकारी साबित हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014-15 से अब तक एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण भारत ने कच्चे तेल के आयात में कमी के चलते लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत की है।

तेल उद्योग ने लोगों से अपील की है कि वे E-20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रांतियों पर विश्वास न करें और प्रमाणित जानकारी के आधार पर ही अपनी राय बनाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक मजबूती और ऊर्जा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

रिपोर्ट : पीआईबी, पटना, इनपुट : निशांत राज

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