
- प्रयागराज में आयोजित समारोह में हिंदी व अंग्रेजी संस्करण का विमोचन, वक्ताओं ने कहा— लोक कथाओं में हनुमान भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर
प्रयागराज- (उत्तर प्रदेश)। झूंसी स्थित सेंट्रल एकेडमी प्रांगण में रविवार को वरिष्ठ साहित्यकार एवं रचनाकार प्रमोद बरार की नवीनतम पुस्तक ‘लोक कथाओं में हनुमान’ (हिंदी एवं अंग्रेजी संस्करण) का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा एवं न्याय जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया और पुस्तक को भारतीय लोक परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
समारोह के मुख्य अतिथि बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी ने पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि यह कृति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का सम्पूर्ण जीवन साधना, समर्पण, सेवा और भक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने अपने जीवन को भक्ति की प्रयोगशाला बनाकर मानवता के लिए आदर्श प्रस्तुत किया है। लोक कथाओं के माध्यम से उनके विविध स्वरूपों को जन-जन तक पहुंचाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सेंट्रल एकेडमी के निदेशक एस. के. तिवारी ने कहा कि संस्थान के लिए यह गौरव का विषय है कि उसके प्रांगण में ऐसी कालजयी एवं सांस्कृतिक महत्व की पुस्तक का लोकार्पण हुआ।
विशिष्ट अतिथि पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय शंकर शुक्ल तथा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विजयानन्द ने पुस्तक की विषय-वस्तु की सराहना करते हुए कहा कि लोक कथाओं में समाहित हनुमान से जुड़ी अनेक दुर्लभ कथाएं भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। यह पुस्तक उन कथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। विषय प्रवर्तक एवं भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के संपादक एवं संयोजक डॉ. भगवान प्रसाद उपाध्याय ने पुस्तक के साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक पक्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला।
समारोह का संचालन शंकर देव त्रिपाठी ने किया, जबकि अंत में पुस्तक के रचयिता प्रमोद बरार ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद, गणमान्य नागरिक एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।





