
श्रेष्ठ पांच कलाकारों को 25-25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि, करीब 50 कलाकारों ने लिया हिस्सा
देहरादून। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, देहरादून में आयोजित चार दिवसीय ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’ लोक एवं जनजातीय कला कार्यशाला, प्रदर्शनी एवं चित्रकला प्रतियोगिता भारतीय लोक कला की विविध रंगों और परंपराओं से जीवंत हो उठी। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी), प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में करीब 50 कलाकारों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
समापन समारोह की मुख्य अतिथि उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक गायिका एवं पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने कहा कि चित्रकला केवल एक विधा नहीं, बल्कि कला-साधना है। लोक कला हमें प्रकृति और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। कलाकार की संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच समाज को भी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि कला समाज में सहयोग, संवाद और आपसी जुड़ाव की भावना को मजबूत करने का माध्यम है।
विशिष्ट अतिथि रंगकर्मी डॉ. राकेश भट्ट ने कहा कि लोक भाषा, लोक संगीत और लोक कला समाज की आत्मा हैं। इनके संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी पारंपरिक कला एवं संस्कृति को समझने और उसे आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की कुलसचिव डॉ. छाबड़ा ने कहा कि एनसीजेडसीसी के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के लिए गौरव का अवसर है। इससे विद्यार्थियों, कला प्रेमियों और आम लोगों को भारतीय लोक एवं जनजातीय कला की विविध परंपराओं को करीब से समझने का अवसर मिला।
आयोजन के समन्वयक डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय लोक एवं जनजातीय कला परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना था। विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने अपनी विशिष्ट कला शैलियों में चित्र एवं अन्य कलाकृतियां तैयार कीं तथा एक-दूसरे की कला परंपराओं और तकनीकों को समझने का अवसर पाया।
चित्रकला प्रतियोगिता में कलाकारों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति, लोकजीवन, मातृभूमि के प्रति सम्मान और भारतीय जीवन मूल्यों को अपनी रचनाओं में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में श्रेष्ठ पांच चित्रों का चयन किया गया। विजेता कलाकार विशाखा गुंज्याल, मानवी सलाथिया, मीरा चौहान, आरुषि सेमवाल और हर्षदीप कौर को 25-25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया। वहीं प्रत्येक प्रतिभागी कलाकार को एनसीजेडसीसी की ओर से 2100 रुपये की सम्मान राशि दी जा रही है।
डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि आयोजन एनसीजेडसीसी, प्रयागराज के निदेशक सुदेश शर्मा के निर्देशन में संपन्न हुआ। ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’ की केंद्रीय थीम के अनुरूप कलाकारों ने भारतीय संस्कृति, परंपरा, प्रकृति और लोकजीवन के विभिन्न आयामों को अपनी कला में अभिव्यक्त किया। विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. आलोक तीर्थ भौमिक और नीलम जयाला तथा निर्णायक मंडल में डॉ. अंजलि थापा और डॉ. शशि झा शामिल रहे।
नोडल अधिकारी डॉ. मंदाकिनी शर्मा ने कहा कि आयोजन पारंपरिक कला विधाओं के संरक्षण-संवर्धन और युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यशाला में शामिल विद्यार्थियों ने कहा कि उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ विषय विशेषज्ञों से कला की बारीकियां सीखने का अवसर मिला।
इस अवसर पर फाइन आर्ट्स विभाग के अध्यक्ष प्रो. आनंद कर्मकार, डॉ. नीलोत्पल, प्रो. एसके सरकार, डॉ. अनिर्बन, डॉ. कपिल कुमार, डॉ. श्रेयसी, डॉ. अजीत कुमार तथा एनसीजेडसीसी प्रयागराज से अजय गुप्ता, राजपाल पांचाल, भूपेंद्र भवानी, मंथन कुमार और राशिका सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कला प्रेमी मौजूद रहे।




