डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास)। गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय (जीएनएसयू) के नारायण इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी द्वारा “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत फार्मास्युटिकल शिक्षा में परिवर्तन : नवाचार, शोध, कौशल विकास एवं उभरती प्रौद्योगिकियां” विषय पर पांच दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का आयोजन किया जा रहा है। 7 से 11 सितंबर तक चल रहे इस कार्यक्रम में फार्मास्युटिकल शिक्षा, शोध, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों के विभिन्न पहलुओं पर देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद एवं शोधकर्ता व्याख्यान दे रहे हैं।
कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. जगदीश सिंह के मार्गदर्शन तथा डीन एवं संयोजक प्रो. डॉ. धर्मेंद्र कुमार के नेतृत्व में किया जा रहा है। सह-संयोजक प्रो. डॉ. ललितेश्वर प्रताप सिंह एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. अरविंद कुमार पटेल के सहयोग से संचालित एफडीपी का मॉडरेशन सहायक प्रोफेसर आयुष कात्यायन कर रहे हैं।
एफडीपी के प्रथम दिन “फार्मास्युटिकल विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता” विषय पर यूपीईएस, देहरादून के प्रो. डॉ. आनंद गौरव ने औषधि खोज, मशीन लर्निंग तथा फार्मेसी शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के सलाहकार प्रो. डॉ. महेंद्र कुमार सिंह ने अतिथि वक्ता एवं प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे अकादमिक कार्यक्रम शिक्षकों एवं शोधार्थियों को बदलते शैक्षणिक और शोध परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को विकसित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं।
दूसरे दिन “फार्मास्युटिकल विज्ञान में उन्नत शोध पद्धतियां” विषय पर पीएसजी कॉलेज ऑफ फार्मेसी, कोयंबटूर के प्रोफेसर एवं एसोसिएट निदेशक (शोध) प्रो. डॉ. एस. एम. हबीबुर रहमान ने शोध अभिकल्प, प्रयोगात्मक योजना, आंकड़ों के विश्लेषण और शोध नैतिकता पर चर्चा की।
तीसरे दिन “नवाचारपरक औषधि विकास” विषय पर आईएफटीएम विश्वविद्यालय, मुरादाबाद के प्रोफेसर एवं निदेशक प्रो. डॉ. अरुण के. मिश्रा ने आधुनिक औषधि खोज, संगणकीय औषधि अभिकल्प और नैनोप्रौद्योगिकी आधारित औषधि वितरण की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के साथ प्रश्नोत्तर एवं संवाद का अवसर भी मिला।
कार्यक्रम के चौथे दिन 10 सितंबर को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर), रायबरेली के प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी द्वारा “वैज्ञानिक लेखन एवं प्रकाशन नैतिकता” विषय पर व्याख्यान दिया जा रहा है। वहीं, 11 सितंबर को जामिया हमदर्द, नई दिल्ली की प्रो. (डॉ.) कंचन कोहली “शोध वित्त पोषण एवं करियर विकास” विषय पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करेंगी।
आयोजकों के अनुसार, एफडीपी का उद्देश्य शिक्षकों एवं शोधार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधुनिक शोध पद्धतियों, वैज्ञानिक लेखन, नवाचार, शोध वित्त पोषण तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग जैसे समकालीन क्षेत्रों में सक्षम बनाना है। यह कार्यक्रम फार्मास्युटिकल शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप आधुनिक, नवाचारपरक एवं कौशल-आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।





