
पटना। रिफॉर्म उत्सव के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में 29 सितंबर को हिंदी पखवाड़ा-2026 का समापन-सह-पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने की। भारत सरकार की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य वीरेंद्र कुमार यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि वीरेंद्र कुमार यादव ने ‘विकसित भारत में राजभाषा हिंदी का योगदान’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने राजभाषा हिंदी के महत्व और विकसित भारत के निर्माण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी देश के विभिन्न वर्गों तक ज्ञान और सूचनाएं पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। कृषि एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में हिंदी के अधिक प्रयोग से वैज्ञानिक तकनीकों, नवाचारों और अनुसंधान के परिणामों को किसानों और आमजन तक सरलता से पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने वैज्ञानिक एवं तकनीकी विषयों को सरल, सहज और व्यवहारिक हिंदी में प्रस्तुत करने तथा कार्यालयी कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपने हस्ताक्षर हिंदी में करने का आह्वान किया।
अध्यक्षीय संबोधन में निदेशक डॉ. अनुप दास ने हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों में वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ संस्थान के कार्यालयी एवं वैज्ञानिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कार्यालयी टिप्पणियों, पत्राचार, प्रतिवेदनों और अन्य प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के नियमित एवं प्रभावी प्रयोग पर बल दिया।

संस्थान राजभाषा कार्यान्वयन समिति के प्रभागाध्यक्ष-सह-उपाध्यक्ष डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने कहा कि वैज्ञानिकों को किसानों से संबंधित अधिक से अधिक आलेख, प्रसार-पुस्तिकाएं और उपयोगी वैज्ञानिक सामग्री हिंदी में तैयार करनी चाहिए। उन्होंने किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने के लिए सरल और सहज भाषा के प्रयोग पर जोर दिया।
इससे पूर्व प्रधान वैज्ञानिक-सह-सदस्य, राजभाषा कार्यान्वयन समिति डॉ. शिवानी ने हिंदी पखवाड़ा-2026 का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि 15 से 28 सितंबर तक निबंध, यूनिकोड टंकण, व्याकरण, आशुभाषण, शब्दार्थ, प्रश्नमंच, स्वरचित काव्य पाठ और अंताक्षरी सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें अधिकारियों, कर्मचारियों और आईएआरआई पटना हब के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर 23 और 24 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय हिंदी कार्यशाला के बारे में भी जानकारी दी गई। कार्यशाला में ई-ऑफिस में हिंदी का प्रयोग तथा कृषि संबंधी जानकारी के प्रचार-प्रसार में ई-मीडिया का योगदान और किसानों की आय एवं जीविकोपार्जन में वृद्धि के लिए कृषि के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को नकद पुरस्कार एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। हिंदी कार्यशालाओं में व्याख्यान देने वाले अधिकारियों को भी प्रशस्ति-पत्र एवं प्रमाण-पत्र दिए गए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सदस्यों सहित उमेश कुमार मिश्र, वरिष्ठ तकनीकी सहायक (हिंदी अनुवादक) का योगदान रहा।





