
पटना। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। उन्होंने खेती की लागत घटाने, फसल विविधीकरण अपनाने और कृषि उत्पादों के बेहतर भंडारण एवं विपणन के लिए किसान समूहों को संगठित करने पर भी जोर दिया। वे शुक्रवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी होने के लाइव प्रसारण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
‘खेत बचाओ अभियान’ के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा से पीएम-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी करने के साथ विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के माध्यम से रासायनिक प्रदूषण से धरती को बचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसमें कुल 417 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 311 किसान थे। कार्यक्रम की शुरुआत मंत्री द्वारा संस्थान परिसर में पौधरोपण से हुई। इसके बाद उन्होंने प्राकृतिक खेती, फल आधारित पोषण वाटिका, समेकित कृषि प्रणाली मॉडल और अन्य अनुसंधान इकाइयों का अवलोकन किया।
मंत्री ने कृषि प्रदर्शनी का भी निरीक्षण किया। इसमें उन्नत फसल किस्मों एवं पशु नस्लों, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, जैव उर्वरकों, हरी खाद, प्राकृतिक खेती और समेकित कृषि प्रणाली से संबंधित तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।

किसानों को संबोधित करते हुए गिरिराज सिंह ने पीएम-किसान की 24वीं किस्त जारी होने पर लाभार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय सहायता से किसानों को कृषि आदान की जरूरतें पूरी करने और खेती से जुड़ी गतिविधियों के संचालन में मदद मिलेगी। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को मृदा और जल संरक्षण, मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा पर्यावरण प्रदूषण कम करने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता घटाने तथा जैव उर्वरक, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक संसाधनों का उपयोग बढ़ाने की अपील की।
मंत्री ने पारंपरिक धान-गेहूं आधारित फसल प्रणाली के साथ उच्च मूल्य वाली फल एवं सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने और फसल विविधीकरण अपनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने पत्तागोभी, प्याज सहित अन्य सब्जियों के गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, बेहतर पौध सामग्री, दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती को प्रोत्साहित करने की बात कही। उनके अनुसार, इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
कृषि उत्पादों के भंडारण और विपणन की समस्या पर चर्चा करते हुए उन्होंने किसानों को स्वयं सहायता समूहों एवं किसान समूहों के रूप में संगठित होने का सुझाव दिया। उन्होंने समूह स्तर पर चार से पांच टन क्षमता वाले छोटे कोल्ड स्टोरेज केंद्र स्थापित करने की जरूरत बताई, ताकि उपज को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सके और किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर अपनी फसल न बेचनी पड़े।
उन्होंने खेती में उन्नत तकनीकों, संसाधनों के कुशल प्रबंधन, बेहतर बाजार संपर्क और मूल्य संवर्धन के माध्यम से लागत कम करने पर भी बल दिया। साथ ही पोषण एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से ओल और सहजन की खेती अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया।
मंत्री ने छोटे एवं सीमांत किसानों की आजीविका सुधारने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की ओर से विकसित तकनीकों एवं प्रयासों की सराहना की। उन्होंने वैज्ञानिकों से पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने का आग्रह किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया और रबी मौसम की सब्जियों के बीज पैकेट वितरित किए।

इससे पहले संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने मुख्य अतिथि एवं किसानों का स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण बताते हुए संस्थान की किसान केंद्रित अनुसंधान गतिविधियों और सामाजिक-आर्थिक पहलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। उन्होंने किसानों से आईसीएआर एवं अन्य कृषि अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से विज्ञान आधारित कृषि तकनीकें अपनाने तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम से पहले आयोजित तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती, धान परती भूमि प्रबंधन, रबी फसलों की खेती, हरी खाद, समेकित कृषि प्रणाली और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे विषयों पर किसानों के साथ संवाद किया तथा तकनीकी जानकारी साझा की। अंत में सामाजिक-आर्थिक एवं प्रसार प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. उज्ज्वल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।




