अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : बर्फ के पहाड़, समुद्र के गहरे पानी, खेल के मैदान और सोन अंचल में भी सामूहिक योगाभ्यास

नई दिल्ली/पटना (सोनमाटी समाचार)। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दुनियाभर में सामूहिक तौर पर योग का आयोजन किया गया। दुनिया भर में हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन होता है। इस परंपरा के अंतर्गत भारत के सभी राज्यों और अन्य देश में भी सामूहिक योग के समारोह आयोजित किए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में और गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में सामूहिक योग किया।
लद्दाख में 18 हजार फीट की ऊंचाई पर आईटीबीपी (भारत तिब्बत सीमा पुलिस) के जवानों ने बर्फीले रेगिस्तान में योग किया। आईटीबीपी के हिमवीरों ने अपने अदम्य हौसले के साथ 12 से 19 हजार फीट की ऊंचाई पर बर्फ पर खड़े होकर सूर्य नमस्कार और अन्य तरह का सामूहिक योग किया। समुद्र में नौसेना के बेड़े आईएनएस विराट, आईएनएस सहयाद्री और आईएनएस ज्योति पर नौसैनिकों ने योग किया।

बिहार में योगाभ्यास, जदयू ने रखा समारोह से अपने को दूर

बिहार में मैदान से लेकर ट्रेनों व घरों की छतों तक योगाभ्यास किए गए। योग दिवस के मौके पर पटना के पाटलिपुत्र स्पोट्र्स कॉम्प्लेक्स में राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल सत्यपाल मलिक, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, रामकृपाल यादव और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सहित भाजपा के नेताओं ने शिरकत की। जदयू ने अपने को पार्टी के स्तर योग के सामूहिक आयोजन से दूर रहने का फैसला किया था। इसी कारण राजधानी पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य जदयू नेता इसमें शामिल नहीं हुए।
नरेंद्र मोदी ने दुनियाभर पहुंचाया योग को : राज्यपाल
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को दुनिया में पहुंचाया। उन्होंने लोगों से नियमित योग करने की अपील की। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि दुनिया भर में योग के प्रचार के लिए प्रधानमंत्री मोदी की पहल प्रशंसनीय है। मगर योग तो घर में रहकर भी किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि योग दिवस समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शामिल नहीं होने का विवाद निरर्थक है। जरूरी नहीं है कि हर कोई योग दिवस के सामूहिक कार्यक्रम में शामिल हो।

करें योग, रहें निरोग : डा. शंभुशरण सिंह

दाउदनगर (औरंगबाद)- विशेष संवाददाता। करें योग रहें निरोग। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर स्वामी विवेकानंद मिशन स्कूल के निदेशक डा. शंभुशरण सिंह ने स्कूल परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए यह मत प्रकट किया और बच्चों को मन की एकाग्रता से संबंधित व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि योग हमारी पुरातन मनीषि संस्कृति और परंपरा की दुनिया को अनुपम अमूल्य उपहार है। भगवन शिव ने योग की क्रिया का ज्ञान सप्तर्षियों को दिया था। हजारों साल पहले महर्षि अगस्त्य ने इसे स्थापित किया। फिर दो हजार साल पहले महर्षि पतंजलि ने इसे समाजोपयोगी मानते हुए इसे धार्मिक-दार्शनिक उपक्रम योगसूत्र से जोड़ा। आधुनिक युग में स्वामी विवेकानंद ने इसे वैश्विक मंच पर आरूढ़ किया। परमहंस योगानंद और केपीएस अयंगर ने योग को जन-जन तक पहुंचाने का व्यावहारिक कार्य किया। अब योग शिक्षक के रूप में ख्यात स्वामी रामदेव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग जनांदोलन के नायक बने। उन्होंने योग को हर घर में, हर दिल में जगह मिलने का आह्वान किया, ताकि नई पीढ़ी स्वस्थ, प्रतिभावान बन सके और नए भारत का निर्माण हो सके।

बीएड कालेज में योगाचार्य ने दी स्वास्थ्यवद्र्धक योगासनों की जानकारी

भगवान प्रसाद शिवनाथ प्रसाद बीएड कॉलेज (दाउदनगर) के सभागार में चौथे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर डा. अमित कुमार के नेतृत्व में योग शिविर का आयोजन किया गया।

योगाभ्यास कार्यक्रम में योगाचार्य अनिल कुमार ने योग के महत्व और इसके विभिन्न आसनों से स्वस्थ रहने के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए एक निश्चित समय निकालकर नियमित योगाभ्यास करना चाहिए।

योगाचार्य ने कहा कि मानसिक एकाग्रता लाने, तनाव से मुक्ति पाने में योग सहायक है। योग ऐसा शारीरिक उपक्रम है, जिसमें अतिरिक्त आर्थिक संसाधन की जरूरत नहींहै मगर नियमित समय और स्वास्थ्य की अपेक्षा के अनुरूप शारीरिक श्रम की जरूरत जरूर होती है।

 

भगवान प्रसाद शिवनाथ प्रसाद बीएड कॉलेज परिसर में आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रम में रामचंद्र यादव, निशांत कुमार, विकास कुमार, संजय शर्मा, उपेंद्र भगत, रंजन आदि कालेज स्टाफ और कालेज के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया।

 

रोहतास जिले में स्कूलों-कालेजों में योग कार्यक्रम
डेहरी-आन-सोन (रोहतास)। रोहतास जिले में भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सामूहिक योगाभ्यास के कार्यक्रम जगह-जगह आयोजित किए गए। सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों-कालेजों के साथ अनेक सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों व खेल मैदानों, उद्यानों में भी योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बताया गया कि योग का करीब पांच हजार साल पहले भारतीय समाज में स्थापित हो गया था। यह भारतभूमि का अद्वितीय आविष्कार है, जिसके उपयोग में कोई पूंजी खर्च नहींहोती और परिणाम हमेशा बेहतर ही होता है।

(वेब रिपोर्ट व तस्वीरें : उपेन्द्र कश्यप, निशांत राज)

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