जलवायु परिवर्तन : तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन


पटना – कार्यालय प्रतिनिधि। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में बुधवार को “जलवायु परिवर्तन परिदृश्य में कदन्न उत्पादन और प्रसंस्करण” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। यह कार्यक्रम आत्मा, गया द्वारा प्रायोजित था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को बदलती जलवायु परिस्थितियों में कदन्न की खेती और प्रसंस्करण तकनीकों पर व्यावहारिक ज्ञान के साथ प्रशिक्षित करना था।

समापन सत्र के अवसर पर निदेशक डॉ. अनुप दास ने जल की कमी और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने में कदन्न की खेती की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने सूखे की स्थिति में कदन्न फसलों की क्षमता पर प्रकाश डाला, जिससे वे संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्य और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण फसल बन गए। डॉ. दास ने खाद्य और पोषण की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने के साथ-साथ किसानों के लिए आय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक रणनीतियों के रूप में फसल विविधीकरण और समेकित कृषि प्रणालियों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग के उपयोग जैसे टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, विशेषकर गया जिले जैसे जल-तनाव वाले क्षेत्रों में, जहां जल संरक्षण कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।

सभी प्रभागाध्यक्षों ने भी कदन्न पर विस्तृत चर्चा करते हुए इसके उत्पादन तकनीक, स्वास्थ्य लाभ, विपणन, पोषण सुरक्षा आदि के बारे में बताया। कार्यक्रम के दौरान एक संवाद सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें किसानों को अपने अनुभव और समस्याओं को साझा करने का मौका मिला। प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया अत्यधिक सकारात्मक थी, जिसमें कई किसानों ने प्रशिक्षण सामग्री और इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर संतोष व्यक्त किया।

समापन सत्र की शुरुआत में पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. राकेश कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम पर एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें इसकी प्रमुख गतिविधियों और परिणामों का सारांश दिया गया। समापन सत्र का समन्वय डॉ. धीरज कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. एन भक्त, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. पी. के. सुंदरम, डॉ. कुमारी शुभा, डॉ. अभिषेक कुमार दूबे और संजय राजपूत भी मौजूद थे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिषेक कुमार दुबे ने किया।

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