
नई दिल्ली। भारत ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के बीच पाँच वर्षों के लिए चावल आपूर्ति का समझौता किया है। इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर बुधवार को हस्ताक्षर किए गए।
समझौते के तहत एफसीआई, डब्ल्यूएफपी को 2,00,000 मीट्रिक टन चावल (अधिकतम 25% टूटा हुआ) उपलब्ध कराएगा। यह समझौता हस्ताक्षर की तिथि से पाँच वर्षों तक प्रभावी रहेगा और पारस्परिक सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा। चावल की कीमत का निर्धारण प्रतिवर्ष आपसी सहमति से किया जाएगा। वर्तमान दर 31 मार्च 2026 तक 2,800 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है।
हस्ताक्षर समारोह में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजिव चोपड़ा की उपस्थिति में एफसीआई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रवींद्र कुमार अग्रवाल तथा डब्ल्यूएफपी के उप-कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि यह साझेदारी भूख और कुपोषण से जूझ रहे लोगों तक आशा, पोषण और सम्मान पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगी। वहीं, कार्ल स्काउ ने इसे वैश्विक भूख के खिलाफ लड़ाई में मील का पत्थर बताते हुए भारत की प्रतिबद्धता की सराहना की।
यह समझौता ‘शून्य भूख’ के वैश्विक लक्ष्य की दिशा में भारत की सक्रिय भूमिका को रेखांकित करता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में भारत की विश्वसनीय छवि को और सुदृढ़ करता है।




