फसल विविधीकरण से बढ़ेगी पैदावार और किसानों की आय : दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

पटना / माधोपुर । किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “फसल विविधीकरण के माध्यम से उत्पादन वृद्धि एवं सतत् कृषि” विषय पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना तथा कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 30 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को फसल विविधीकरण, समेकित कृषि प्रणाली तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में जागरूक करना है, जिससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके।

इस परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं फसल अनुसंधान प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि फसल विविधीकरण आज की कृषि की बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ विभिन्न फसलों को शामिल करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उन्होंने समेकित कृषि प्रणाली के आंकड़ों के माध्यम से यह भी बताया कि इस पद्धति से उत्पादकता और आय दोनों में सकारात्मक बदलाव संभव है।

कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक कुमार ने जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में फसल विविधीकरण और कृषिवानिकी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बदलते मौसम के प्रभाव को कम करने के लिए बहुफसली खेती और वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली काफी प्रभावी साबित हो सकती है।

कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. सौरभ दुबे ने किसानों को फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। वहीं केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. हर्षा बी. आर. ने उन्नत फसल उत्पादन तकनीकों से किसानों को अवगत कराया।जानकारी के अनुसार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 10 से 11 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें किसानों को विभिन्न कृषि विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक और तकनीकी जानकारी दी जाएगी।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह, डॉ. जगपाल, डॉ. चेलपुरी रामुलु सहित अन्य कर्मचारियों का भी उल्लेखनीय सहयोग रहा।

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