स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को उपचार एवं पुनर्वास की नयी- नयी तकनीकों को हमेशा सीखते रहना चाहिए : डॉ. महेंद्र कुमार सिंह

डेहरी-आन-सोन  (रोहतास) विशेष संवाददाता। स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को उपचार एवं पुनर्वास की नयी- नयी तकनीकों को हमेशा सीखते रहना चाहिए ताकि विश्व स्तर पर चिकित्सा एवं पुनर्वास विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर हो रही प्रगति तथा शोध की जानकारी से वह अवगत होते रहें। यह बातें “न्यूरो डेवलपमेंटल टेक्निक” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला के उदघाटन के अवसर पर गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. महेंद्र कुमार सिंह ने कही। कार्यशाला का उदघाटन माँ सरस्वती की तस्वीर पर पुष्प अर्पण एवं द्वीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कुलपति महोदय ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी प्रतिभागियों से कहा कि दो दिवसों में अधिक से अधिक ज्ञानार्जन करें जिससे कि उनके माध्यम से मरीजों को नयी तकनीकों का लाभ मिल सके।

ज्ञात हो कि यह कार्यशाला नारायण पैरामेडिकल इंस्टिट्यूट एंड अलाइड साइंसेज, गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, जमुहार, रोहतास के फिजियोथेरेपी विभाग द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के वरिष्ठ फ़िज़ियोथेरेपिस्ट एवं न्यूरो डेवलपमेंटल टेक्निक के रास्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ प्रशिक्षक डॉ. प्रभात रंजन हैं। इनके द्वारा पक्षाघात एवं मानसिक विकासात्मक विकारों से प्रभावित मरीजों के उपचार एवं पुनर्वास की तकनीकों पर फ़िज़ियोथेरेपिस्ट एवं फिजियोथेरेपी के विद्याथियों के समूह को सैद्धांतिक सह व्यावहारिक प्रशिक्षण दे दिया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में अपने संबोधन में नारायण पैरामेडिकल इंस्टिट्यूट एंड अलाइड साइंसेज के निदेशक डॉ. अवनीश रंजन ने बताया कि पक्षाघात एवं मानसिक विकासात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे मरीजों के उपचार एवं पुनर्वास में संलग्न विशेषज्ञों को इस तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करने में सहायता मिलेगी तथा व्यापक पुनर्वास सेवाओं के माध्यम से मरीजों को उनकी पूर्ण क्षमता तक पहुंचने के लिए सशक्त बनाना आसान होगा।


उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब हमारे संस्थान में भी इन समस्याओं से प्रभावित मरीजों का इस नयी तकनीक के माध्यम से सुचारू रूप से उपचार की सुविधा प्रारंभ किया जा रहा है। साथ ही जनमानस से यह अपील की कि इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठा कर मरीजों को स्वतंत्र जीवन यापन के लिए पहल करें। इस अवसर विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव मिथिलेश कुमार सिंह, फिजियोथेरेपी विभाग के प्रमुख तथा कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. नरेंद्र कुमार एवं आयोजन समिति के सदस्य सहायक प्राध्यापक डॉ. विजय पठानिया ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर मेडिकल एवं पैरामेडिकल विभाग के चिकित्सकगण,शिक्षकगण तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। उदघाटन सत्र के अंत में धन्यवाद ज्ञापन एन.पी. आई. एस. के मेडिकल लेबोरेटरी विभाग के प्रमुख डॉ. राज कमल बिभूति ने किया।

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