अल नीनो के खतरे के बीच आईसीएआर ने किसानों के लिए परामर्श जारी

पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने बिहार में संभावित अल नीनो प्रभाव को देखते हुए किसानों के लिए विशेष कृषि परामर्श जारी किया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), पटना केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार जुलाई माह में बिहार के अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा और सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है, जिससे शुरुआती मौसम में सूखे का खतरा बढ़ सकता है।

जारी परामर्श में धान उत्पादक किसानों को कम अवधि वाली एवं सूखा-सहनशील धान की किस्मों, जैसे स्वर्ण श्रेया, स्वर्ण उन्नत, प्रभात, तुरंता, सहभागी, राजेंद्र श्वेता, डीआरआर-46 तथा एराइज 6129 एवं एराइज 6444 की खेती करने की सलाह दी गई है। वहीं पानी की कमी वाले क्षेत्रों में अरहर, मक्का, रागी, सोयाबीन और मोटे अनाज (मिलेट्स) जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाने की अनुशंसा की गई है।

परामर्श में कहा गया है कि जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो, वहां धान की सीधी बुवाई (डायरेक्ट सीडेड राइस) और सामुदायिक नर्सरी की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाए। बेहतर अंकुरण के लिए बीजों की सीड प्राइमिंग तथा बुवाई से पहले बीज उपचार करने की भी सलाह दी गई है।

जल प्रबंधन के तहत किसानों को वैकल्पिक गीला एवं सूखा (एडब्ल्यूडी) सिंचाई पद्धति अपनाने, खेतों की मेड़ों की मरम्मत करने तथा वर्षा जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया गया है। वहीं पोषक तत्व प्रबंधन के लिए नाइट्रोजन उर्वरक को एक साथ देने के बजाय 3-4 किस्तों में देने, नीम-लेपित यूरिया के उपयोग तथा सूखे की स्थिति में 2 प्रतिशत यूरिया या एनपीके घोल का पर्णीय छिड़काव करने की अनुशंसा की गई है।

खरपतवार नियंत्रण के लिए अंकुरण-पूर्व एवं अंकुरण-पश्चात उपयुक्त खरपतवारनाशियों के वैज्ञानिक उपयोग के साथ-साथ कोनो-वीडर से यांत्रिक निराई और फसल अवशेषों से मल्चिंग करने की सलाह दी गई है।

पूर्वी अनुसंधान परिसर ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम आधारित कृषि सलाह का पालन कर समय पर वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएं, ताकि संभावित सूखे की स्थिति में भी फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके।

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