डेहरी में एनडीए का कमाल: लोजपा(आर) के राजीव रंजन सिंह ने 35,968 वोटों से रचा इतिहास

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)- निशांत राज। रोहतास के राजनीतिक गलियारों में इस बार डेहरी विधानसभा सीट सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही। वर्षों से जातीय समीकरण और राजनीतिक परंपराओं के लिए पहचानी जाने वाली इस सीट ने 2025 में एक नया इतिहास रच दिया। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रत्याशी राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह ने भारी जनसमर्थन के साथ राजद के गुड्डू चंद्रवंशी को 35,968 मतों से करारी शिकस्त दी और डेहरी में एनडीए को केवल दूसरी बार जीत दिलाई।

एनडीए के लिए डेहरी सीट हमेशा से सियासी परीक्षा-स्थल रही है। जनसंघ के दौर से लेकर भाजपा और फिर एनडीए गठबंधन तक कई बड़े नाम यहां उतरे, लेकिन जीत अब तक दूर ही रही। डेहरी में जातीय समीकरण को भले ही राजनीति की धुरी माना जाता है, मगर दिलचस्प यह है कि हर बार यह समीकरण उलटते-पलटते रहे और परिणाम अपेक्षित दिशा से भटक गए। यही वजह है कि डेहरी अब भी उन सीटों में शामिल है, जहां राजनीतिक हवा का अनुमान लगाना सबसे मुश्किल माना जाता है।

क्षेत्र की सामाजिक संरचना में वैश्य और यादव मतदाता पारंपरिक रूप से चुनावी नतीजों को प्रभावित करते रहे हैं। हालांकि, तीसरा सबसे बड़ा समूह क्षत्रिय समाज भी संतुलन साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद इस सीट पर क्षत्रिय उम्मीदवारों का लगातार हारना एक राजनीतिक पहेली बनी रही।
लेकिन इस बार समीकरण बदले। लोजपा (आर) ने राजीव रंजन सिंह पर दांव लगाया और सिंह ने वर्षों पुरानी पराजय की कड़ी तोड़ते हुए स्पष्ट और प्रभावशाली जीत दर्ज की।

कुल 2,98,856 मतदाताओं वाले डेहरी विधानसभा क्षेत्र में 63.82% वोटिंग हुई। पुरुषों में 63.54% और महिलाओं में 64.12% मतदान हुआ। इसमें से राजीव रंजन सिंह को 1,04,022 वोट मिले, जबकि राजद उम्मीदवार को 68,054 वोट प्राप्त हुए।

बताते चलें कि राजीव रंजन सिंह की पत्नी नीतू सिंह प्रखंड प्रमुख और जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं, जबकि उनके पिता स्व. ललन सिंह भी 2019 में डेहरी से चुनाव लड़ चुके थे, मगर उन्हें सफलता नहीं मिली।

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