सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र का अनोखा प्रयोग: 20 टन कोयले की राख से रची माँ सरस्वती की भव्य कलाकृति

भागलपुर। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर विद्या, ज्ञान और कला की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की पूजा श्रद्धा और उत्साह के साथ की गई। विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक क्लबों में भक्तजन माँ शारदे की आराधना में लीन रहे और वातावरण भक्तिमय बना रहा। वहीं दूसरी ओर बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव प्रखंड अंतर्गत एकचारी क्षेत्र में भारत के चर्चित अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने कोयले की राख से माँ शारदा भवानी की एक अद्भुत और दिव्य कलाकृति का निर्माण किया।

कभी समुद्र तट पर तो कभी पीपल के हरे पत्तों पर अपनी अनोखी कलाकारी से दुनिया भर में पहचान बना चुके अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने इस बार सरस्वती पूजा के अवसर पर एक अनूठा प्रयोग किया। उन्होंने 20 टन (20,000 किलोग्राम) कोयले की राख का उपयोग कर लगभग 15 फीट ऊँची माँ सरस्वती की भव्य आकृति का निर्माण किया।


सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र के इस अनोखे प्रयोग को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो कोयले की राख में माँ शारदा भवानी साक्षात प्रकट हो गई हों। इस कलाकृति के माध्यम से उन्होंने “हैप्पी सरस्वती पूजा” का संदेश भी अंकित किया है।


मधुरेंद्र की यह अद्भुत कलाकृति सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गई और लोग इसे आस्था, कला और पर्यावरणीय संदेश का प्रेरणादायक संगम बता रहे हैं।

इस अद्भुत रचना में माँ सरस्वती को वीणा धारण किए हंस की सवारी करते हुए दर्शाया गया है, जबकि पास में मोर की एक मनोहारी आकृति भी उकेरी गई है। कलाकार मधुरेंद्र कुमार ने बताया कि इस कलाकृति के माध्यम से वे ज्ञान, रचनात्मकता और विश्व शांति का संदेश देना चाहते हैं।

रेतकला के जादूगर के रूप में विख्यात मधुरेंद्र कुमार प्राकृतिक आपदाओं, समसामयिक घटनाओं और ज्वलंत सामाजिक विषयों पर आधारित अपनी कलाकृतियों के जरिए सकारात्मक संदेश देने के लिए देश-विदेश में जाने जाते हैं। अपनी विशिष्ट और नवाचारी कला के बल पर वे अब तक 50 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं।

वे ऐसे पहले भारतीय कलाकार हैं जिन्हें लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड तथा हाल ही में बौद्ध महोत्सव के अवसर पर भगवान बुद्ध के जीवन पर आधारित 50 रेत प्रतिमाओं के निर्माण के लिए यूनाइटेड नेशंस (यूएन) बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान प्राप्त हुआ है।

Share
  • Related Posts

    नारायण मेडिकल कॉलेज में स्तनपान कक्ष की स्थापना, माताओं को मिला सुरक्षित और निजी स्थान

    डेहरी-आन-सोन (रोहतास )। नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की ओर से बाल रोग विभाग एवं प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के सहयोग से विश्व स्तनपान सप्ताह…

    Share

    पाँच टीमें, एक लक्ष्य: खेत तक पहुँचेगा कृषि अनुसंधान

    पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में आयोजित तीन दिवसीय संस्थान अनुसंधान परिषद बैठक–2026 का शुक्रवार को समापन हुआ। 5 से 7 अगस्त तक चली बैठक में पूर्वी…

    Share

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

    You Missed

    नारायण मेडिकल कॉलेज में स्तनपान कक्ष की स्थापना, माताओं को मिला सुरक्षित और निजी स्थान

    नारायण मेडिकल कॉलेज में स्तनपान कक्ष की स्थापना, माताओं को मिला सुरक्षित और निजी स्थान

    पाँच टीमें, एक लक्ष्य: खेत तक पहुँचेगा कृषि अनुसंधान

    पाँच टीमें, एक लक्ष्य: खेत तक पहुँचेगा कृषि अनुसंधान

    रोहतास में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स की बैठक, पर्यटन, स्वच्छता और साइबर सुरक्षा को लेकर बनी रणनीति

    रोहतास में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स की बैठक, पर्यटन, स्वच्छता और साइबर सुरक्षा को लेकर बनी रणनीति

    ईओ हत्याकांड पर एनडीए नेताओं की प्रेस वार्ता, कहा- जांच को राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण

    ईओ हत्याकांड पर एनडीए नेताओं की प्रेस वार्ता, कहा- जांच को राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण

    दीघा तट पर रेत से साकार हुए महादेव, सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने दिया विश्व शांति का संदेश

    दीघा तट पर रेत से साकार हुए महादेव, सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने दिया विश्व शांति का संदेश

    छपरा में सम्मान समारोह सह काव्य पाठ, प्रो. पंकज कुमार को लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान

    छपरा में सम्मान समारोह सह काव्य पाठ, प्रो. पंकज कुमार को लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान