
पटना। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के साथ गुरुवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा विकसित समेकित कृषि प्रणाली (आईएफएस) के एक एवं दो एकड़ मॉडल का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने इन मॉडलों को किसानों के खेतों तक बड़े पैमाने पर पहुंचाने और कृषि प्रौद्योगिकियों के त्वरित विस्तार पर जोर दिया।
आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास तथा अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना-समेकित कृषि प्रणाली (एआईसीआरपी-आईएफएस) के प्रधान अन्वेषक एवं फसल उत्पादन विभाग के प्रमुख डॉ. संजीव कुमार ने केंद्रीय मंत्री को पूर्वी भारत के छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए विकसित आईएफएस मॉडलों के विभिन्न घटकों की विस्तृत जानकारी दी।
भूमिहीन किसानों के लिए विकसित किए गए नैनो और माइक्रो होमस्टेड मॉडल
डॉ. अनुप दास ने बताया कि भूमिहीन किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से संस्थान ने 125 वर्ग मीटर के नैनो एवं 250 वर्ग मीटर के माइक्रो होमस्टेड फार्मिंग मॉडल विकसित किए हैं। इनमें पोषण वाटिका, फल उत्पादन, बकरी पालन, कुक्कुट पालन और मशरूम उत्पादन जैसे घटकों को एकीकृत किया गया है।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने आईएफएस मॉडलों की सराहना करते हुए कहा कि फसल उत्पादन, बागवानी, दुग्ध उत्पादन, समेकित मत्स्य पालन, बत्तख पालन और कुक्कुट पालन जैसे विविध घटकों का एकीकरण संसाधनों के कुशल उपयोग और किसानों की आय वृद्धि में अत्यंत प्रभावी है।
उन्होंने तालाब के मेड़ों पर आम, केला, नींबू और अमरूद जैसे फलों की खेती, जल निकायों के ऊपर लता वाली सब्जियों की ऊर्ध्वाधर खेती, एजोला उत्पादन तथा वर्मी-कम्पोस्टिंग जैसे नवाचारों की भी प्रशंसा की।
किसानों के खेतों तक बड़े पैमाने पर मॉडल पहुंचाने का आह्वान
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ऐसे मॉडलों का किसानों के खेतों तक बड़े पैमाने पर विस्तार किया जाना चाहिए। इससे खेती के जोखिम को कम करने के साथ किसानों की आय बढ़ाने और उनकी आजीविका को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने संस्थान परिसर में आम का पौधा भी रोपित किया। आईएफएस मॉडल अपनाने वाले किसानों ने भी उनसे संवाद करते हुए अपने अनुभव साझा किए और बताया कि आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर के सहयोग से उनकी आय में तीन से पांच गुना तक वृद्धि हुई है।
आईसीएआर संस्थानों के निदेशकों के साथ हुई बैठक
इससे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री ने विभिन्न आईसीएआर संस्थानों के निदेशकों के साथ बैठक की। इस दौरान उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह ने उनका स्वागत किया। बैठक में मंत्री को संस्थानों की प्रमुख उपलब्धियों, भविष्य की रणनीतियों और अनुसंधान सहयोग के संबंध में जानकारी दी गई।
डॉ. अनुप दास ने संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए समेकित कृषि प्रणाली, धान परती प्रबंधन और फसल विविधीकरण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डाला।
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आईसीएआर द्वारा विकसित कृषि प्रौद्योगिकियों का तेजी से किसानों तक प्रसार होना चाहिए। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों, कृषि विस्तार एजेंसियों और किसानों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता बताई, ताकि नई तकनीकों का प्रभावी प्रसार हो और जमीनी स्तर पर उनका व्यापक लाभ किसानों तक पहुंच सके।
इस अवसर पर डॉ. रंजय कुमार सिंह, सहायक महानिदेशक (कृषि विस्तार), तथा एनआरसी लीची के निदेशक डॉ. विकास दास सहित अन्य अधिकारी और वैज्ञानिक उपस्थित थे।




