
पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत संचालित आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने रविवार को अपना 26वाँ स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ए. के. नायक, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), आईसीएआर, नई दिल्ली उपस्थित रहे।
अपने स्थापना दिवस व्याख्यान में डॉ. नायक ने “विकसित भारत @2047 के लिए प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से संबंधित कृषि अनुसंधान रोडमैप” पर प्रकाश डालते हुए भूमि क्षरण तटस्थता, कार्बन क्रेडिट तंत्र, स्मार्ट एवं सतत जल प्रबंधन, उर्वरकों में आत्मनिर्भरता तथा जैव विविधता संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने वैज्ञानिकों से जलवायु-अनुकूल एवं जैव-संवर्धित फसल किस्मों के विकास को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने स्वागत भाषण में 25 वर्षों की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए समेकित कृषि प्रणाली, धान परती प्रबंधन, फसल विविधीकरण, स्मार्ट जल प्रबंधन एवं कोयला खनन प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्स्थापन जैसी तकनीकों का उल्लेख किया। संस्थान द्वारा विकसित 12 जलवायु-सहिष्णु धान, 1 चना, 63 सब्जी, 2 बाकला एवं 6 फल किस्मों के साथ पूर्णिया गाय, मेदिनी गाय, पलामू बकरी, माला मुर्गी, मैथिली बत्तख एवं कोड़ो बत्तख जैसे पशुधन संसाधनों के पंजीकरण को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया।
कार्यक्रम में अटारी, पटना, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया तथा बामेती के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया।

नवाचारी कृषक सम्मेलन, तकनीकी प्रदर्शनी, समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर, हिंदी पुस्तकों का विमोचन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को जीवंत बनाया। 11 राज्यों से आए 300 से अधिक किसानों सहित लगभग 650 हितधारकों ने भाग लेकर अनुभव साझा किए। अंत में आयोजन सचिव डॉ. ए. के. चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।



