ग्रामीण आजीविका सुधार हेतु समेकित मत्स्य पालन प्रशिक्षण का सफल समापन

पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ( आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में मत्स्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा प्रायोजित “ग्रामीण आजीविका सुधार हेतु समेकित मत्स्य पालन की तकनीकियाँ” विषय पर आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। 20 से 23 मार्च तक चले इस प्रशिक्षण में अररिया जिले के 31 किसानों ने भाग लिया।

समापन अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने किसानों को संबोधित करते हुए समेकित कृषि प्रणाली अपनाने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन के साथ बत्तख पालन जोड़ने से उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि संभव है। साथ ही तालाब के किनारे आम, अमरूद, नींबू जैसे फलदार वृक्ष तथा सेम और टमाटर जैसी सब्जियों की खेती को अपनाने की सलाह दी।

पशुधन एवं मात्स्यिकी प्रबंधन प्रभाग के प्रभागाध्यक्ष डॉ. कमल शर्मा ने कहा कि समेकित मत्स्य पालन प्रणाली संसाधनों के समुचित उपयोग पर आधारित एक टिकाऊ एवं लाभकारी मॉडल है, जिससे किसानों को बहुआयामी आय के अवसर मिलते हैं। वहीं, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग के डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने जल प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए तालाब प्रबंधन, वर्षा जल संचयन और जलवायु अनुकूल तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों, तालाब प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, आहार प्रबंधन एवं समेकित कृषि प्रणाली के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही प्रक्षेत्र भ्रमण और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया, जिससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। किसानों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उनकी आजीविका सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफलता में पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. सुरेन्द्र कुमार अहिरवाल, सह-निदेशक डॉ. बिश्वजीत देबनाथ, डॉ. तारकेश्वर कुमार, डॉ. विवेकानंद भारती एवं डॉ. राकेश कुमार सहित अन्य तकनीकी अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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