ज्ञान अर्जन में संवाद की भूमिका अतिमहत्वपूर्ण: डॉ. आर.आर. बर्मन

पटना -कार्यालय प्रतिनिधि। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में बुधवार को आईएआरआई पटना हब के विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणादायक संवाद सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. आर.आर. बर्मन और विशिष्ट अतिथि के रूप में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि प्रसार शिक्षा विभागाध्यक्ष प्रो. कल्याण घड़ेई उपस्थित थे। संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने स्वागत करते हुए कृषि प्रसार के क्षेत्र में डॉ. बर्मन के बहुमूल्य योगदान के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि उनका विशाल अनुभव विद्यार्थियों को व्यवहारिक चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करेगा। इसके बाद डॉ. उज्ज्वल कुमार द्वारा एक सूचनाप्रद प्रस्तुति दी गई, जिसमें आईएआरआई पटना के छात्रों की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं सह-पाठ्यक्रम क्षेत्रों में उपलब्धियों को रेखांकित किया गया।

अपने प्रेरक संबोधन में डॉ. आर.आर. बर्मन ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे आईएआरआई की पहचान को गर्व से अपनाएं, चुनौतियों का सामना करते हुए संस्थान की परंपरा को बनाए रखें। उन्होंने स्वाध्याय पर विशेष बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को प्रमुख पाठ्यपुस्तकों की पहचान कर उन्हें पढ़ना चाहिए, संवाद सत्रों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए तथा समस्याओं के समाधान की सोच के साथ सीखने की प्रवृत्ति विकसित करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कक्षा के साथ-साथ किसानों से संवाद करना व्यावहारिक ज्ञान को गहराई से समझने का उत्तम माध्यम है।

डॉ. बर्मन ने निरंतर मार्गदर्शन और सहभागिता हेतु ऑनलाइन संवाद सत्र आयोजित करने पर भी अपने विचार रखे। प्रो. कल्याण घड़ेई ने कृषि के वैश्विक महत्व पर प्रेरणादायक दृष्टिकोण साझा करते हुए बताया कि 43% वैश्विक परियोजनाएं और 51% स्टार्टअप कृषि से संबंधित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आईएआरआई के मानकों को बनाए रखने, शैक्षणिक उत्कृष्टता, व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं नवाचार के माध्यम से स्वयं को विशिष्ट बनाने का आह्वान किया।

सत्र का समापन बंदा साईनाथ द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने अतिथियों को उनके बहुमूल्य विचारों एवं उत्साहवर्धन के लिए आभार व्यक्त किया।

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