उन्नत थेरापी तकनीकों से आटिज्म व अतिचंचलता से प्रभावित बच्चों में जीवन कौशल सुधार संभव: डॉ. मंजरी राज

डेहरी -आन-सोन (रोहतास)। नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर स्थित नारायण केयर बाल पुनर्वास केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि आटिज्म एवं अतिचंचलता से प्रभावित बच्चों के जीवन कौशल को बेहतर बनाने में उन्नत थेरापी तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यशाला में पटना से आईं वरिष्ठ ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट डॉ. मंजरी राज ने प्रशिक्षक के रूप में संबोधित करते हुए बताया कि आधुनिक थेरापी पद्धतियां बच्चों के व्यवहार, संचार क्षमता और दैनिक जीवन कौशल को विकसित करने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रही हैं।

इस प्रशिक्षण कार्यशाला में ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट, स्पीच थेरापिस्ट, विशेष शिक्षक, पुनर्वास विशेषज्ञ, आटिज्म व अतिचंचलता से प्रभावित बच्चों के अभिभावक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए।कार्यक्रम के सफल आयोजन पर बधाई देते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि नारायण केयर बाल पुनर्वास केंद्र विकासात्मक विकार से प्रभावित बच्चों के पुनर्वास के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहा है।

वहीं विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर गोविन्द नारायण सिंह ने विशेषज्ञों एवं अभिभावकों से अपील की कि वे इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लें, ताकि पुनर्वास के क्षेत्र में हो रहे नवीन प्रयोगों और तकनीकों की जानकारी मिलती रहे।

औरंगाबाद सदर के विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने अपने संदेश में कहा कि यह केंद्र दक्षिण बिहार में विकासात्मक विकार से प्रभावित बच्चों के पुनर्वास और विशेष शिक्षा के लिए अग्रणी संस्था के रूप में कार्य कर रहा है।

इस अवसर पर नारायण मेडिकल कॉलेज अस्पताल की निदेशक (चिकित्सा) डॉ. आकांक्षा सिंह ने केंद्र द्वारा प्रदान की जा रही उन्नत चिकित्सा एवं पुनर्वास सेवाओं की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।केंद्र प्रभारी एवं पुनर्वास विज्ञान संकाय के डीन डॉ. अवनीश रंजन ने बताया कि कार्यशाला दो सत्रों में आयोजित की गई। पहले सत्र में बच्चों एवं उनके अभिभावकों के साथ समस्याओं के प्रबंधन पर चर्चा की गई, जबकि दूसरे सत्र में पुनर्वास विशेषज्ञों को उन्नत थेरापी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि केंद्र में प्रत्येक शनिवार को विभिन्न विषयों पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा पेडियाट्रिक थेरापिस्ट, विशेष शिक्षक, स्पीच थेरापिस्ट एवं अभिभावकों को नई तकनीकों से अवगत कराया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों और अभिभावकों के बीच बच्चों के गृह-आधारित पुनर्वास के पहलुओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

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