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बिहार की पांच हाट सीट : बेगूसराय, उजियारपुर, काराकाट, सासाराम, पटना साहिब और तीन परिवाद

बिहार में जातीय ध्रुवीकरण की कवायद, शह-मात देने के लिए सियासी चाल-दर-चाल, तीखे आरोप-प्रत्यारोप और सच-झूठ के तिलस्म के बीच 17वींलोकसभा चुनाव के लिए सात चरणों में से चार चरण के चुनाव 11 अप्रैल, 18 अप्रैल, 23 अप्रैल, और 29 अप्रैल को हो चुके हैं, जिनमें क्रमश: 04, 05, 05 और 05 सीटें थीं। पांचवें चरण में 6 मई को 8 सीटों, छठे चरण में 12 मई को 05 सीटों, सातवें चरण में 19 मई को 08 सीटों के लिए मतदान होना है। वोटों की गिनती 23 मई को होनी है और जनता का फैसला आना है। बिहार में इस बार कई लोकसभा क्षेत्र कई-कई कारणों से हाट सीटें बन गए हैं।

 

1. उजियारपुर :

यहां नए सामाजिक समीकरण की अग्निपरीक्षा के परिणाम का इंतजार है, जहां 29 अप्रैल को मतदान हो चुका है और लड़ाई कांटे की मानी गई है। उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र कुशवाहा और यादव मतदाता बहुल है। नित्यानंद राय यादव समाज से और कुशवाहा समुदाय से उपेंद्र कुशवाहा आते हैं। क्षेत्र के सांसद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय के नहीं आने से लोगों में नाराजगी रही है। हालांकि इस क्षेत्र के लोगों की दोनों नेताओं नित्यानंद राय और पूर्व केेंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के लिए यह टिप्पणी रही है कि दिल्ली, मुम्बई रहिएगा तो क्षेत्र से उखड़ जाइएगा। नित्यानंद राय ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए यह बताया कि नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना देश के लिए क्यों जरूरी है? और, यह कहा कि उपेंद्र कुशवाहा काराकाट से भागकर आए हैं और यहां से हारने के बाद फिर भागेंगे। जबकि उपेंद्र कुशवाहा ने बताया कि देश और लोकतंत्र दोनों खतरे में है। उपेंद्र कुशवाहा काराकाट लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और वह काराकाट के साथ उजियारपुर सेे भी चुनाव लड़ रहे हैं। इस क्षेत्र में 2014 में नित्यानंद राय ने राजद प्रत्याशी आलोक कुमार मेहता को हराया था। तब नित्यानंद राय को 317352, राजद के आलोक कुमार मेहता को 256883, जदयू के अश्वमेध देवी को करीब सवा लाख और सीपीएम के रामदेव वर्मा को करीब 53 हजार वोट मिले थे। इससे पहले 2009 के चुनाव में जदयू की अश्वमेध देवी राजद के आलोक कुमार वर्मा को हरा चुकी हैं। इस बार रालोसपा (उपेंद्र कुशवाहा) महागठबंधन में हैं और नीतीश कुमार (जदयू) एनडीए में हैं। इसलिए देखना दिलचस्प होगा कि उजियारपुर में नए सामाजिक समीकरण की लड़ाई में मतदाताओं ने क्या फैसला दिया?

2. बेगूसराय :

बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र की चर्चा देश भर में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के कारण है। जेएनयू परिसर में राष्ट्रविरोधी नारेबाजी और देशद्रोह के आरोप वाले मुकदमे के कारण वह सुर्खी में रहे हैं। उनके पास सियासत के लिहाज से खोने के लिए कुछ नहींहै। यहां कन्हैया कुमार का मुख्य मुकाबला भाजपा के फायर ब्रांड नेता केेंद्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह है, जहां 29 अप्रैल को मतदान हो चुका है। राजद के तनवीर हसन ने यहां मुकाबला त्रिकोणात्मक बनाया, जो पिछले चुनाव में मत संख्या के हिसाब से नम्बर-दो स्थिति में थे। कन्हैया के लिए स्वरा भास्कर, जावेद अख्तर जैसी बालीवुड हस्तियों ने और गिरिराज सिंह के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तक ने जोर लगाया। सीपीआई के महासचिव सुधाकर रेड्डी को 24 अप्रैल को तेजस्वी प्रसाद यादव से अपील की कि कन्हैया की निर्णायक जीत के लिए राजद अपना उम्मीदवार (तनवीर हसन) को चुनाव मैदान से हटा ले। इस दिलचस्प संघर्ष के मद्देनजर मतगणना तक जिज्ञासी बनी रहेगी कि कितने मतदाताओं ने किसके नाम पर बटन दबाया।

3. सासाराम :

इस सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र में यह सवाल मतगणना होने तक तैरता रहेगा कि क्या मीरा कुमार छेदी पासवान को हरा पाएंगी? सासाराम संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व 1952 की पहली लोकसभा से 1984 की आठवीं लोकसभा तक पूर्व उप प्रधानमंत्री रहे जगजीवन राम ने किया। 1989 में नौवींलोकसभा के लिए जगजीवन राम की आईएफएस बेटी मीरा कुमार ने विदेश सेवा की नौकरी से त्यागपत्र देकर ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए यहां से चुनाव लड़ा, मगर स्थानीय नेता छेदी पासवान से हार गईं। हारने के बाद मीरा कुमार ने सासाराम संसदीय क्षेत्र से मुंह मोड़ लिया। यहां से 1991 में छेदी पासवान और 1996, 1998, 1999 में भाजपा के मुनी लाल ने चुनाव जीता। मीरा कुमार फिर लोकसभा का चुनाव लडऩे सासाराम पहुंचीं और 2004, 2009 में जीत हासिल की। इस बीच वह लोकसभा की अध्यक्ष भी बनीं। 2014 के चुनाव में वह फिर छेदी पासवान से हार गईं। 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले छेदी पासवान ने जदयू से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में छेदी पासवान (भाजपा) को 43 फीसदी, मीरा कुमार (कांग्रेस) को 36 फीसदी, कर्रा परसू रमैया (जदयू) को 11 फीसदी मत मिले थे।

4. काराकाट :

सीट बेचने के आरोप वाले उपेंद्र कुशवाहा बिहार में एकमात्र प्रत्याशी हैं, जो काराकाट और उजियारपुर दोनों लोकसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले चुनाव में उनके पास खोने के लिए कुछ नहींथा, मगर इस बार हार गए तो उनकी पार्टी का अस्तित्व खत्म भी हो सकता है। उन्होंने एनडीए छोड़कर अपने राजनीतिक जीवन का बड़ा रिस्क लिया है। उपेंद्र कुशवाहा ने 2013 में राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर रिस्क लिया और रालोसपा का गठन किया था। वे जदयू से राज्यसभा के सदस्य थे और उनका साढ़े तीन साल का कार्यकाल बाकी था। रालोसपा बनाकर वह एनडीए का हिस्सा बने और तालमेल में आई तीनों सीटों पर 2014 का लोकसभा चुनाव की जीत दर्ज की। तब देश में नरेंद्र मोदी की लहर थी। महत्वाकांक्षी उपेंद्र कुशवाहा के केंद्रीय राज्यमंत्री के पद से इस्तीफा देकर राजग से नाता तोडऩे के फैसले से उनकी पार्टी के प्रमुख कुशवाहा नेता नागमणि, श्रीभगवान सिंह कुशवाहा, सम्राट चौधरी अलग हो गए। शहीद जगदेव प्रसाद के बाद कुशवाहा समाज की अगुआई करने वालों चंद्रदेव प्रसाद वर्मा, शकुनी चौधरी, नागमणि, सम्राट चौधरी और उपेंद्र कुशवाहा में उपेंद्र कुशवाहा ने ही दल बनाने, टिकट बांटने की युक्ति निकाली। अब उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी (रालोसपा) में अकेले रह गए हैं। सांसद डा. अरुण कुमार ने रालोसपा से अलग हो राष्ट्रीय समता पार्टी बना ली है और तीसरे सांसद रामकुमार शर्मा एनडीए के साथ हैं। रालोसपा से अलग होकर विधायक ललन पासवान ने भी अलग पार्टी (राष्ट्रवादी लोक समता पार्टी) बना ली है। काराकाट में मतदान अंतिम सातवें चरण में 19 अप्रैल को है। यहां उपेंद्र कुशवाहा का मुकाबला 2014 में जमानत गंवा देने वाले जदयू प्रत्याशी महाबलि सिंह से है। महाबली सिंह 2009 में यहां से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं।

5. पटना साहिब :

दो दोस्तों की सियासी दुश्मनी का गवाह बने गंगा नदी के दक्षिणी किनारे पर अवस्थित सिखों के गुरु गोविन्द सिंह के पटना साहिब में चुनाव अंतिम सातवें चरण में 19 मई को है। बिहारी बाबू नाम से लोकप्रिय बहुचर्चित अभिनेता-राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा का पटना साहिब सीट पर इस बार मुकाबला अपने ही मित्र केेंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से है, जो जनसंघ के एक संस्थापक सदस्य ठाकुर प्रसाद के पुत्र हैं। दोनों राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी कायस्थ समाज के प्रतिनिधि हैं। शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा से साढ़े तीन दशक का राजनीतिक संबंध समाप्त कर कांग्रेस के टिकट पर पटना साहिब से चुनाव लड़ रहे हैं। 2009 में शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने ही समाज के प्रतिद्वंद्वी फिल्म अभिनेता शेखर सुमन (राजद) और 2014 में भोजपुरी फिल्म अभिनेता कुणाल सिंह को हराया था। कायस्थों के साथ यादवों, भूमिहारों और वैश्य बहुल पटना साहिब में इस बार सियासत का समीकरण बदल चुका है। जिन मतदाताओं ने शत्रुघ्न सिन्हा को दो बार नापसंद किया था, उनके सामने स्वीकार करने की और जिन लोगों ने पसंद किया था, उनके सामने विरोध करने की मजबूरी है। इसलिए पटना साहिब का मुकबाल बेहद दिलचस्प और दम साध कर परिणाम की प्रतीक्षा करने वाला है।

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हाट सीट के तीन परिवाद : राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद  और कन्हैया कुमार पर मारपीट के आरोप

बिहार में भाजपा के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की ओर से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का परिवाद दर्ज किया गया। विवाद का विषय राहुल गांधी का 13 अप्रैल को कोलार, बेंगुलुरू में दिया गया भाषण है, जिसमें उन्होंने कहा कि सारे मोदी चोर हैं। सुशील मोदी की ओर से दर्ज परिवाद में कहा गया कि राहुल गांधी के भाषण में मोदी टाइटल वाले सभी व्यक्ति को चोर बताया गया है। पटना जिला के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में भारतीय दंड विधान की धारा 500 के तहत दाखिल हुए इस परिवाद के तीन गवाह संजीव चौरसिया, नीतीन नवीन और मनीष कुमार हैं।
दूसरी तरफ, पटना की ही अदालत में भाजपा का समर्पित कार्यकर्ता का दावा करने वाले संजीव वर्मा ने केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, उनके निजी सहायक संजीव कुमार सिंह, विधायक अरुण कुमार सिन्हा, विधायक नितिन नवीन और अन्य पांच के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया। इस परिवाद में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कुमार गुंजन ने मामले की सुनवाई की तारीख निर्धारित कर शिकायतकर्ता को उपस्थित होने का निर्देश दिया। इसमें पिछले महीने जयप्रकाश नारायण हवाई अड्डा परिसर में मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। तब पटना साहिब सीट से भाजपा उम्मीदवार घोषित होने के बाद रविशंकर प्रसाद पहली बार शहर आए थे और कुछ भाजपा समर्थकों ने नाराजगी जाहिर की थी।
उधर, बेगूसराय में वामपंथी दलों के साझा उम्मीदवार कन्हैया कुमार और उनके समर्थकों के खिलाफ मारपीट का मामला गढ़पुरा थाना में दर्ज किया गया। जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उनके समर्थकों से स्थानीय लोगों के एक समूह के बीच कोराय गांव में झड़प कन्हैया कुमार के रोड-शो के दौरान हो गई। रोड शो के दौरान काले झंडे दिखाए गए और नारेबाजी की गई तो कन्हैया कुमार के समर्थकों ने मारपीट की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ। गढ़पुरा के थाना प्रभारी प्रतोश कुमार के अनुसार, 22 अप्रैल को कोराय गांव के कुमार राहुल के लिखित बयान पर कन्हैया कुमार समेत 12 लोगों पर मारपीट की एफआईआर दर्ज की गई है।

 

(देहरादून, दिल्ली कार्यालय से प्रकाशित समाचार-विचार पाक्षिक चाणक्य मंत्र में विशेष रिपोर्ट —

बिहार में सत्ता का सियासी सर्कस का अंश)

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— कृष्ण किसलय

समूह संपादक, सोनमाटीडाटकाम
सोनमाटी प्रेस-गली, जोड़ा मंदिर, न्यूएरिया,
पो. डालमियानगर-821305, जिला रोहतास (बिहार)
फोन 9708778136

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