लाकडाउन में घर लौटा फिल्मकार, शुरू किया गोबर-मूर्ति कारोबार

दाउदनगर, औरंगाबाद (बिहार)-सोनमाटी टीम। आम तौर पर गाय के गोबर से खाद और बायो-गैस बनता रहा है, मगर अब इससे धूप-अगरबत्ती के साथ दीया और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां भी बनाई जाने लगी हैं। चौरम गांव वासी फिल्म-टीवी सीरियल के निर्देशक संतोष बादल ने गाय के गोबर से नए उत्पाद के निर्माण के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने अपने उत्पाद उपक्रम का नाम संतोष बादल फाउंडेशन रखा है। संतोष बादल के अनुसार बिहार में गोबर से ऐसे उत्पाद का निर्माण पहली बार हो रहा है। उत्पादन फिलहाल बिहार के मधुबनी में हो रहा है। जल्द ही चौरम में भी होगा, जहां ग्राहकों के आदेशानुसार होम डिलीवरी की भी व्यवस्था होगी। संतोष बादल का कहना है, चूंकि सनातन संस्कृति में गाय और इसके गोबर को पवित्र माना जाता है, इसलिए दीया और मूर्ति बनाने में सिर्फ गाय के गोबर का उपयोग किया जा रहा है। गाय के गोबर के लिए गोशाला बनाया गया है और दूसरी गोशालाओं से गोबर खरीदा जाता है। गाय का दूध, घी ही नहीं, इसके मूत्र से बने कई उत्पाद भी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

गाय के गोबर से बन रहा धूप, अगरबत्ती, मूर्ति, दीया आदि उत्पाद

मिट्टी और प्लास्टर आफ पेरिस से बनी रंगीन पारंपरिक मूर्तियों के नदी में विसर्जन से प्रदूषण बढ़ता है, क्योंकि वे पानी में जल्दी घुलती नहीं। गोबर की मूर्तियां पानी में जल्द घुल जाती हैं। आनलाइन आदेश पर गाय के गोबर से बनी मूर्ति पार्सल के जरिये भेजी जाती है। डिजाइन ऐसा किया गया है कि भेजे गए बाक्स में ही मूर्ति को नदी, तालाब, खेत-क्यारी या घर के फूल-गमले में विसर्जित किया जा सकता है। पार्सल बाक्स का उपयोग मूर्ति विसर्जन होने तक आवास परिसर में छोटे गमला के रूप में किया जा सकता है। मूर्ति, दीया घुलने बाद खाद का काम करेंगी। प्रदूषण का दायर आज जितना विस्तृत हो चुका है, उसमें जल घुलनशील गोबर आधारित उत्पादों का उपयोग बढ़ाने की जरूरत है। संतोष बादल के अनुसार, लाकडाउन में घर लौटने पर पंचगव्य गुरुकुलम तमिलनाडु से गव्य शिक्षा में डिप्लोमा प्राप्त शेखर कुमार से गाय संरक्षण के साथ गोबर-मूत्र उत्पाद पर चर्चा हुई और उत्पादन का उपक्रम आरंभ किया गया। उनका दावा है कि लाकडाउन में करीब 500 लोगों को उनके उपक्रम से रोजगार मिला।

स्टुडियो-ब्याय से निर्देशक तक का सफर :

चौरम से वर्ष 1996 में मुंबई पहुंचे संतोष बादल ने फिल्म इंडस्ट्री के निर्देशक होमी वाडिया के स्टूडियो में उसके रख-रखाव करने के साथ उनके घर का खाना बनाने, घरेलू कपड़ा धोने तक का कार्य किया। वीडियो रिकार्डिंग और उसकी एडीटिंग के गुर सीखे। 1997 में वीडियो संपादन का काम शुरू किया और वर्ष 2000 तक बतौर वीडियो एडिटर 09 पुरस्कार प्राप्त किए, इंडस्ट्री में जगह बनाई। एकता कपूर ने अपनी सीरियल (सास भी कभी बहु थी) में निर्देशक के रूप में मौका दिया, जो एशिया का हिट सीरियल बना। 2016 तक टीवी इंडस्ट्री के विभिन्न सीरियलों के करीब 06 हजार एपिसोड का निर्देशन किया। इनमें नागिन, नागिन-2, परमावतार श्रीकृष्णा, हातिम सुपरहिट रही। चार फीचर फिल्मों में एक फाइनल मैच तो काफी सफल रहा। संतोष बादल को श्रेष्ठ निर्देशक के नौ अवार्ड मिल चुके हैं और 2000 में सबसे कम उम्र का निर्देशक होने का रिकार्ड भी इनके नाम है। फिल्म दी रिटन्र्स आफ डा. जगदीशचंद्र बसु को दुनिया भर में 124 अवार्ड मिले।

रिपोर्ट, तस्वीर : संतोष अमन, संपादन : कृष्ण किसलय

Share
  • Related Posts

    डेहरी में उल्लास के संग मनाया गया चित्रांशों का होली मिलन

    डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-निशांत राज । रंगों की फुहार, गीतों की सरगम और अपनों के संग ठहाकों से गूंजता माहौल—कुछ ऐसा ही दृश्य रविवार की शाम नील कोठी स्थित चन्द्रराज वाटिका में…

    Share

    लायंस क्लब का भव्य होली मिलन समारोह, सरकारी अधिवक्ता विनोद मिश्रा का सम्मान

    सासाराम (रोहतास)-कार्यालय प्रतिनिधि।  होली के पावन अवसर पर लायंस क्लब ऑफ़ सासाराम द्वारा होली मिलन समारोह 2026 का भव्य एवं गरिमामय आयोजन उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में क्लब…

    Share

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

    You Missed

    डेहरी में उल्लास के संग मनाया गया चित्रांशों का होली मिलन

    डेहरी में उल्लास के संग मनाया गया चित्रांशों का होली मिलन

    लायंस क्लब का भव्य होली मिलन समारोह, सरकारी अधिवक्ता विनोद मिश्रा का सम्मान

    लायंस क्लब का भव्य होली मिलन समारोह, सरकारी अधिवक्ता विनोद मिश्रा का सम्मान

    रोहतास में जदयू जिलाध्यक्ष निर्वाचन पर बवाल, गंभीर आरोपों से घिरा नेतृत्व

    रोहतास में जदयू जिलाध्यक्ष निर्वाचन पर बवाल, गंभीर आरोपों से घिरा नेतृत्व

    65वें स्थापना दिवस पर मगध विश्वविद्यालय ने तय की नई दिशा

    65वें स्थापना दिवस पर मगध विश्वविद्यालय ने तय की नई दिशा

    कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में ‘कृषि यंत्रीकरण एवं फसल अवशेष प्रबंधन’ पर 4 दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

    कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में ‘कृषि यंत्रीकरण एवं फसल अवशेष प्रबंधन’ पर 4 दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

    अंतर फार्मेसी कॉलेज क्रिकेट टूर्नामेंट में नारायण इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी उपविजेता

    अंतर फार्मेसी कॉलेज क्रिकेट टूर्नामेंट में नारायण इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी उपविजेता