जारी है लोकतंत्र की हत्या

-जुल्मतों की दौर में विषय पर सेमिनार में कन्हैया कुमार, प्रो. डेजी नारायण व प्रो. एसएच मालाकार ने कहा
हसपुरा (औरंगाबाद)-सोनमाटी समाचार। गौतमबुद्ध टाउनहॉल में ज़ुल्मतों के दौर में विषय पर चर्चा में मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र नेता कन्हैया कुमार, प्रोफेसर डेजी नारायन और प्रोफेसर एसएच मालाकार थे। हसपुरा सोशल फोरम द्वारा आयोजित सेमिनार की अध्यक्षता आरिफ रिजवी, अलखदेव प्रसाद अचल, सत्येन्द्र सिंह व मो. शाहनवाज के अध्यक्ष मंडल ने की और विषय प्रर्वतन अनीश अंकुर ने किया।
मोदी तो झांसों के राजा
वक्ताओं ने मौजूदा केेंद्र सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें झांसों का राजा बताया। कहा कि हिंदुस्तान को बांटने और देश की प्रेरणास्पद स्मृतियों को विस्मृत करने की की साजिश की जा रही है। आर्थिक नवउदारवाद से देश में नई तरह का खतरा पैदा हो गया है। देश को स्वालम्बी बनाने की कसम खाकर सत्ता में आने वाले देश बेचने पर उतारू हैं। प्रधानमंत्री भले ही विदेशी पूंजी निवेश को आमंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन देश की न्यूनतम आंतरिक स्थिति को संतोषजनक नहींहोने के कारण बाहर से देश में संतोषजनक निवेश नहीं आ रहा है। ज़ुल्मतों का दौर देश की जनता पर भारी है। इसके विरुद्ध संघर्ष जारी रखना होगा, तभी अच्छे दिन भले न आएं, मगर बुरे दिन भी नही रहेंंगे ।

आर्थिक विषमता बरकरार
वक्ताओं ने देश की आर्थिक स्थिति और आर्थिक विषमता की चर्च करते हुए कहाकि लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। इकोनॉमी का केन्द्रीकरण बढ़ता जा रहा है। सरकार विज्ञापन की कलाबाजी पर टिकी हुई है। समाज को तोड़कर राज करने का प्रयास जारी है। विकास के नाम पर लोगों को सिर्फ ठगा जा रहा है। युवाओं को असली सवाल से भटकाया जा रहा है। देश के भ्रष्ट लोगों ने अब भाजपा का दामन थाम लिया है। जो पीढ़ी इतिहास को भुला देती है, उसे इतिहास भी भुला देता है। विकास शिक्षा से हो सकता है। मगर शिक्षा के साथ स्वास्थ्य व बेरोजगारी के सवाल पर केेंद्र सरकार नकारा साबित हुई है। किसान कर्ज की बोझ से कराह रहे हैं। फसल बीमा करने वाली कंपनियां अरबों की कमाई कर रही हैं। यह सवाल खड़ाकर कि कांग्रेस ने 70 सालों में क्या दिया, सत्ता पर कब्जा जमाने वाले अब साढ़े तीन साल में बेनकाब हो चुके हैं।
धर्म के नाम पर राजनीति की कवायद
वक्ताओं ने कहा कि पैगंबर के अपमान और राम के नाम पर धर्म के ठेकेदार अब सड़क की राजनीति करने पर आमादा हैं। उन्होंने वामपंथियों को सलाह दी कि वे नफरत फैलाने वालों को माक्र्स से नहीं, कबीर की शैली में जवाब दें। आज इतिहास के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा है। अकबर और महाराणा प्रताप पर गलत इतिहास लिखकर नफरत की खेती करने वालों से बचने की जरूरत है।
आरंभ में आगतों का स्वागत अलखदेव प्रसाद अचल ने किया। कार्यक्रम का संचालन गजेंद्र ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत इप्टा की टीम द्वारा गीत (ले मशाले चल पड़े लोग हमारे गांव के…) के सस्वर-ससंगीत गायन से हुई।
वेब रिपोर्टिंग व तस्वीर : शम्भूशरण सत्यार्थी

 

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