प्रोफेशनल विधि शोध संस्थान के रूप में विकसित होगा नारायण ला कालेज

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-कार्यालय संवाददाता। जमुहार स्थित नारायण ला कालेज को एक विधि शोध संस्थान के रूप में भी विकसित किया जाएगा। यह केवल कानून की शिक्षा देने और डिग्री बांटने वाला कालेज नहींहोगा। इस कालेज में शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी निश्चित ही समय और समाज की जरूरत के अनुरूप अपने को प्रतिस्पर्धी तरीके से तैयार करने में समर्थ हो सकेेंगे। यह कहना है गोपालनारायण सिंह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राज्यसभा सांसद गोपालनारायण सिंह का। श्री सिंह का कहना है कि परंपरागत कानून की शिक्षा प्राप्त करने वाले पिछड़े रह जाएंगे। इसलिए नारायण ला कालेज में नए प्रोफेशनल तरीके से कानून की शिक्षा देने का पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।
बार काउंसिल आफ इंडिया कर चुका है निरीक्षण
गोपालनारायण सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित नारायण ला कालेज के प्राचार्य अरुण कुमार सिंह के अनुसार, नए सत्र से पढ़ाई आरंभ करने वाले ला कालेज के परिसर का निरीक्षण बार काउंसिल आफ इंडिया द्वारा किया जा चुका है और काउंसिल द्वारा इसकी आधारभूत संरचना, पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब की व्यवस्था आदि को लेकर संतोष भी व्यक्त किया जा चुका है।

एक व्यावहारिक कालेज बनेगा नारायण ला कालेज
यह सूचना देते हुए विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी भूपेन्द्रनारायण सिंह की ओर से बताया गया है कि विश्वविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव गोविन्दनारायण सिंह और प्रंबध निदेशक त्रिविक्रमनारायण सिंह इस संस्थान (नारायण ला कालेज) को सैद्धांतिक शिक्षण संस्थान से इतर व्यावहारिक शोध संस्थान के रूप में कार्य करने के लिए प्रयासरत हैं और इसके लिए जिला न्याय प्राधिकरण से संभव सहयोग प्राप्त करने का प्रयत्न कर रहे हैं।

 

एक ही परिवार के तीन बेटे बन गए दिव्यांग

संझौली (रोहतास)-सोनमाटी समाचार। मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे छुलकार गांव के देवमुनि सिंह के तीनों बेटे दिव्यांग हैं। 16 वर्ष के बड़ेा बेटे मंतोष के 12 वर्ष की उम्र में हाथ-पैर अचानक सूखने लगे और छह माह में ही वह दिव्यांग हो गया था। बड़े बेटे का इलाज हो रहा था कि 10 वर्षीय धन्तोष के भी हाथ-पैर सूखने लगे और वह भी चलने-फिरने में असमर्थ हो गया। दोनों के इलाज में थोड़ी पुश्तैनी जमीन भी बिक गई। छह महीने पहले तीसरा बेटा आठ वर्षीय रमतोष भी इसी बीमारी की चपेट में आ गया।

यह पोलियो है या मांसपेशी सिकुडऩे की कोई बीमारी, स्वास्थ्य विभाग इससे अंजान है।

खपरैैल के शौचालय विहीन घर में रहने वाले इस परिवार का नाम बीपीएल में नहीं है। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। खाद्य सुरक्षा के तहत इस वर्ष से अनाज मिलने लगा है। दो को दिव्यांग पेंशन मिलती है, पर यह राशि इस परिवार के लिए ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है। तीसरे की पेंशन स्वीकृति हो चुकी है।

बहन मधु कुमारी और उसकी मां अनिता देवी उम्मीद लगाए बैठी हैं कि उसके परिवार को आयुष्मान भारत और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।

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