हालात पर हौसले की जीत

मेरठ। हौसले कभी भी हालात की परवाह नहीं करते। आगे बढने का जज्बा हो तो पथरीले पथ पर भी कदम बढाते हुए पथिक मंजिल हासिल कर ही लेता है। लखनऊ विश्व विद्यालय के दीक्षांत समारोह में आज तीन स्वर्ण पदक व एक नगद पुरस्कार पाने वाली . संस्कृत की मेधावी छात्रा श्वेता गुप्ता ने ऐसा ही कर दिखाया है।
मोहनलालगंज के गरीब किसान घर की बेटी श्वेता गुप्ता के संघर्ष और सफलता की कहानी उन तमाम छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरक व अनुकरणीय हैं जो गरीबी व संसाधनों के अभाव में कठिन परिश्रम कर ना केवल अपनी पढाई का प्रबंध करते हैं बल्कि परिवार का भी भरण-पोषण करते हैं।
श्वेता का निजी जीवन दुश्वारियों से भरा है। गरीबी से जुझते परिवार में पिता का सहारा बनने को स्नातक की पढाई बीच में ही छोड़ उसने निजी संस्थानों में कंप्यूटर टाइपिंग की नौकरी की। दो छोटे भाई और एक छोटी बहन की पढाई का प्रबंध करते हुए उसने बीते दो बरस पहले अपनी छूटी हुई आगे की पढाई फिर से शुरू की। श्वेता ने संस्कृत विषय से एम. ए. में दाखिला लिया। एक तरफ पढाई की धुन तो दूसरी तरफ उसकी निजी जिंदगी एक के बाद एक इम्तिहान ले रही थी। ह्रदयाघात से पिता चल बसे। अब तो पूरा घर उसी पर आश्रित हो गया। शोकाकुल परिवार और खुद को कुछ उबार पाती कि इससे पहले पिता की मौत के गम में मां बेहोश होकर गिरी जिससे उसकी कमर की कई हड्डियाँ टूट गई। अब तो उसकी जिम्मेदारी और भी जटिल है गई।
इन विकट परिस्थितियों में श्वेता लक्ष्य से डिगी नहीं। लखनऊ विश्व विद्यालय एम. ए. संस्कृत में उसने चारों सेमेस्टर में विश्वविद्यालय टॉप किया। सफलता का कारवां यही नहीं थमा बल्कि “नेट” परीक्षा में भी सफलता हासिल की। श्वेता को वर्ष 2017 में एम. ए. 1st to 4th सेमेस्टर में 83. 36% अंक हासिल कर संस्कृत की श्रेष्ठ छात्रा होने के लिए कु. विमला पुरी स्वर्ण पदक, एम. ए. प्रथम व एम. ए. फाइनल में संयुक्त रूप से सर्वाधिक प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए श्रीमती चंद्रादेवी एवं श्री राधाकृष्ण अरुणवंशी स्वर्ण पदक, एम. ए. द्वितीय में वैदिक ग्रुप परीक्षा में सर्वाधिक अंक पाने के लिए श्रीमती चंद्रकली पांडेय स्मृति स्वर्ण पदक एवं एम. ए. में सभी सेमेस्टर में छात्रा के रूप में सर्वाधिक अंक प्रतिशत के लिए श्रीमती इंद्राणी देवी स्मृति नगद पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
श्वेता की प्रतिभा और कीर्त पर नाज है। श्वेता महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल हैं। देश को गर्व है।

-पत्रकार जितेंद्र दीक्षित की फेसबूक वॉल से

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