आपसी कलह और ईर्ष्या बनी पत्रकारों के पतन का कारण

झूठा अहम नैतिकता के क्षरण में बना सहायक

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)-सोनमाटी प्रतिनिधि। आपसी कलह और ईर्ष्या से ही पत्रकारों का नैतिक पतन हो रहा है तथा प्रदेश भर में आए दिन उनका उत्पीड़न भी किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में यदि वह अपना झूठा अहम छोड़कर एकजुट नहीं हुए तो वह इसी तरह प्रताड़ित होते रहेंगे। अपने अलग अस्तित्व का तथाकथित मोह छोड़कर एक मंच पर आने की नितांत आवश्यकता है, जिससे उनकी नैतिकता का क्षरण न होने पाए।
उपरोक्त उद्गार भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. भगवान प्रसाद उपाध्याय ने उसे समय कही जब वे जन्माष्टमी के अवसर पर नरसिंहपुर में आयोजित पत्रकारों की एक गोष्ठी में बतौर अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश में विशेष तौर से उत्तर प्रदेश में पत्रकारों की स्थिति बहुत दयनीय हो गई है और वह यत्र तत्र झूठे मुकदमे अथवा माफियाओं के शिकार हो रहे हैं। उन्हें अपने तथाकथित दंभ को त्याग कर एक मंच पर आना होगा और यदि आप बिखरे रहेंगे तो इसी तरह आपका उत्पीड़न होता रहेगा।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे सुप्रसिद्ध साहित्यकार राकेश माहेश्वरी ने कहा कि हमें अपनी कलम को सार्थक दिशा में चलना होगा तथा समाज की विसंगतियों को दूर करने के लिए राष्ट्रीय भावना को सर्वोपरि रखना होगा। श्री माहेश्वरी ने कहा कि आज जो कुछ भी संक्रमण का दौर चल रहा है उससे हम सभी को सतर्क और सचेत रहने की आवश्यकता है तथा अपनी रचना धर्मिता के प्रति निष्ठा बनाए रखना है। हमें किसी वाद में न पड़़कर सदैव वसुधैव कुटुंबकम की भावना से अपनी कलम को चलना होगा।
गोष्ठी का संचालन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार सतीश कुमार तिवारी सरस ने कलमकारों का आह्वान किया कि वह समय की मांग को देखते हुए अब अपने अस्तित्व को बचाने हेतु एक मंच पर आ जाएं तथा पूरे देश में एक साथ एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें जिससे आए दिन हो रहे पत्रकारों का उत्पीड़न यथा संभव कम हो सके। श्री तिवारी ने कहा कि हम नई पीढ़ी के पत्रकारों से अपेक्षा करेंगे कि वह अपने पूर्वजों का सम्मान करेंगे और उनसे कुछ शिक्षा ग्रहण करके अपने दंभ का परित्याग करेंगे तभी उनका विकास संभव है।

गोष्ठी में स्थानीय अन्य कई पत्रकारों ने भी अपने विचार रखे और अंत में भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ की स्थानीय इकाई को सशक्त बनाने पर पूर्ण रूप से सहमति व्यक्त की गई।

(रिपोर्ट: डा. भगवान उपाध्याय)

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