सिक्किम के किसानों के लिए पटना में समेकित कृषि प्रणाली पर विशेष प्रशिक्षण

पटना- कार्यालय प्रतिनिधि। जैविक खेती के लिए देशभर में पहचान रखने वाले सिक्किम राज्य के लघु एवं सीमांत किसानों के कौशल विकास और क्षमता संवर्धन के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा समेकित कृषि प्रणाली विषय पर एक उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण 02 से 06 फरवरी 2026 तक संचालित होगा।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सिक्किम राज्य से कुल 27 किसान भाग ले रहे हैं, जिनमें 18 महिलाएँ शामिल हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सीमित संसाधनों के कुशलतम उपयोग से कृषि उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय में वृद्धि करना तथा टिकाऊ एवं जलवायु-अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करना है।

कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने सिक्किम के किसानों को उन्नत एवं स्मार्ट खेती की दिशा में कदम बढ़ाने पर बधाई दी। उन्होंने अपने संबोधन में भूमि एवं जल प्रबंधन की उन्नत तकनीकों—जैसे ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, कृषि अपशिष्ट का पुनर्चक्रण, कम्पोस्ट निर्माण, ग्राफ्टिंग, समेकित जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा कृषि-वानिकी—को अपनाने पर विशेष बल दिया।उन्होंने किसानों की आय में स्थायी वृद्धि के लिए डेयरी, सुअर पालन जैसे सहायक उद्यमों को कृषि प्रणाली में शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को कम से कम एक ऐसा उच्च-मूल्य घटक अवश्य चुनना चाहिए, जिससे आय में गुणात्मक वृद्धि संभव हो, जैसे—गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उत्पादन, स्ट्रॉबेरी की खेती, उच्च मूल्य फल फसलें, मशरूम स्पॉन उत्पादन तथा कृषि प्रसंस्करण गतिविधियाँ।

कार्यक्रम के पाठ्यक्रम निदेशक एवं फसल अनुसंधान प्रभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि समेकित कृषि प्रणाली किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है, जो कृषि के विविध घटकों को जोड़कर उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि करती है।

भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण और संसाधन दक्षता समेकित कृषि प्रणाली की आधारशिला हैं, जो दीर्घकालीन कृषि स्थिरता सुनिश्चित करती हैं।

पशुधन एवं मात्स्यिकी प्रबंधन प्रभागाध्यक्ष डॉ. कमल शर्मा ने बताया कि पशुधन एवं मत्स्यिकी घटक न केवल कृषि अपशिष्ट के पुनर्चक्रण में सहायक हैं, बल्कि अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर भी सृजित करते हैं।

सामाजिक-आर्थिक एवं प्रसार प्रभागाध्यक्ष डॉ. उज्ज्वल कुमार ने कहा कि समेकित कृषि प्रणाली की सफलता वैज्ञानिक तकनीकों के प्रभावी प्रसार, किसानों के प्रशिक्षण और उनकी सक्रिय सहभागिता पर निर्भर करती है।

पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. शिवानी ने बताया कि यह प्रणाली फसल उत्पादन, पशुपालन और अन्य कृषि उद्यमों को एकीकृत कर संसाधनों के अधिकतम उपयोग और आय वृद्धि का अवसर प्रदान करती है।

कार्यक्रम का संचालन पाठ्यक्रम सह-निदेशक डॉ. अभिषेक कुमार, वैज्ञानिक, आईसीएआर -पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा किया गया। अंत में वैज्ञानिक एवं पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. कुमारी शुभा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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