समेकित कृषि प्रणाली पर प्रायोगिक प्रशिक्षण ने किसानों में बढ़ाया आत्मविश्वास

पटना- कार्यालय प्रतिनिधि। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “समेकित कृषि प्रणाली : समय की मांग” का समापन शुक्रवार को हुआ। यह प्रशिक्षण बिहार कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान, पटना द्वारा प्रायोजित था। कार्यक्रम 9 दिसंबर से संचालित हुआ, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए 15 कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधकों एवं 5 प्रगतिशील किसानों ने सहभागिता की।


समापन सत्र को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि “समेकित कृषि प्रणाली के विभिन्न घटकों का सभी स्तरों पर एकीकरण ही इसकी सफलता का मूल आधार है।” उन्होंने किसानों को सुझाव दिया कि वे छोटे पैमाने पर शुरुआत कर उपलब्ध संसाधनों एवं स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर धीरे-धीरे नए कृषि घटकों को जोड़ते जाएँ। इससे उत्पादन क्षमता और लाभ दोनों में वृद्धि संभव है।


पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने प्रशिक्षण के विभिन्न तकनीकी सत्रों एवं प्रक्षेत्र भ्रमण की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रतिभागी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन, व्यावहारिक सत्रों और प्रशिक्षण सामग्री से अत्यंत संतुष्ट रहे।
प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक और व्यवहारिक बताया तथा अपने-अपने क्षेत्रों में तकनीकों को अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।


कार्यक्रम में प्रभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष उपाध्याय, डॉ. कमल शर्मा और डॉ. उज्ज्वल कुमार ने समेकित कृषि प्रणाली की संभावनाओं एवं घटकों पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ प्रस्तुत कीं। समापन समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए तथा श्रेष्ठ प्रशिक्षु को विशेष सम्मान दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रचना दूबे ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी द्वारा प्रस्तुत किया गया।

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