- विधायक बोले—कर्म, संघर्ष और सिद्धांत का अद्वितीय संगम थे कर्पूरी ठाकुर

डेहरी -आन-सोन (रोहतास)- कार्यालय प्रतिनिधि। भारत के सामाजिक न्याय आंदोलन के प्रखर प्रतीक और भारतरत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती डेहरी शहर में श्रद्धा, सम्मान और विचार-विमर्श के साथ मनाई गई। डेहरी स्थित जननायक कर्पूरी ठाकुर चौक पर उनकी आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर राष्ट्रीय नाई महासभा समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें नमन किया।इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर कर्म को ही जीवन का आधार मानते थे। वे किसी एक वर्ग, बिरादरी या राजनीतिक समूह के नेता नहीं थे, बल्कि हर उस व्यक्ति के नेता थे जो मेहनत और ईमानदारी में विश्वास रखता है। उनके नहीं रहने से मेहनतकश तबके में जो सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रिक्तता उत्पन्न हुई है, वह आज भी महसूस की जाती है।
विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर अपने विचारों और सिद्धांतों के कारण आज भी जनमानस में जीवित हैं। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने वंचित और उपेक्षित समाज को नई पहचान और आत्मविश्वास दिया, जिससे समाज की आने वाली पीढ़ियों को सशक्त आधार मिला।

राष्ट्रीय नाई महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार शर्मा ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर बिहार की सीमाओं से कहीं आगे तक सम्मानित नेता थे। उनकी सादगी, स्पष्टता और दृढ़ संकल्प उन्हें असाधारण बनाता है। नगर अध्यक्ष धनंजय शर्मा ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर समाजवादी विचारधारा के केवल प्रवक्ता नहीं, बल्कि उसे अपने आचरण में उतारने वाले सच्चे नेता थे।
पूर्व विधायक इंजीनियर सत्यनारायण सिंह ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर की जयंती केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प अवसर है। उन्होंने कहा कि जननायक हमेशा बिहारवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्याम बिहारी राम, नगर परिषद के मुख्य पार्षद प्रतिनिधि गुड्डु चंद्रवंशी, बबल कश्यप, बिमल सिंह, रवि शर्मा, मदन कुमार, नारायण ठाकुर, प्रकाश गोस्वामी, कन्हाई ठाकुर, उमेश ठाकुर, दीपक शर्मा, धनंजय यादव, कुंवर सिंह सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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