
पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों के लिए चार दिवसीय क्षमता निर्माण एवं आदान सहायता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। उत्तर-पूर्वी पर्वतीय घटक कोष से समर्थित इस कार्यक्रम में असम, सिक्किम, त्रिपुरा, मेघालय तथा नागालैंड से आए 27 प्रगतिशील किसान एवं कृषि उद्यमी शामिल हुए।
प्रतिभागियों को संस्थान में विकसित वैज्ञानिक एवं उन्नत कृषि प्रणालियों का विस्तृत अवलोकन कराया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने किसानों से संवाद करते हुए खेती को केवल जीविकोपार्जन नहीं, बल्कि लाभकारी उद्यम के रूप में अपनाने का आह्वान किया। वर्मीकंपोस्ट की अलग-अलग राज्यों में भिन्न कीमतों पर चर्चा के दौरान उन्होंने ‘अंतर-राज्यीय विपणन प्रणाली’ विकसित करने का सुझाव दिया, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिल सके।
किसानों ने संस्थान के ‘समेकित कृषि प्रणाली’ मॉडल का गहन अध्ययन किया, जो पारंपरिक खेती से अधिक वैज्ञानिक एवं लाभकारी है। उन्हें स्थानीय जलवायु के अनुरूप फसल चयन, भूमि के समुचित उपयोग तथा संसाधन प्रबंधन की तकनीकों से अवगत कराया गया।
डॉ. उज्ज्वल कुमार ने किसानों से अपने-अपने क्षेत्रों में ‘ब्रांड एंबेसडर’ की भूमिका निभाने का आग्रह किया। वहीं, डॉ. आशुतोष उपाध्याय और डॉ. कमल शर्मा ने भूमि, जल, पशुधन एवं मत्स्य संसाधनों के कुशल प्रबंधन पर बल दिया। वैज्ञानिक डॉ. विवेकानंद भारती ने उच्च मूल्य वाली मछली पालन तकनीकों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में किसानों को न्यूट्री-गार्डन बीज, कृषि उपकरण एवं अन्य उपयोगी कृषि इनपुट वितरित किए गए। किसानों ने विश्वास जताया कि यहां से प्राप्त ज्ञान उनके राज्यों में कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाएगा।





