
सासाराम (रोहतास)-कार्यालय प्रतिनिधि। शहर के पटेल धर्मशाला में संपन्न हुए जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) के जिलाध्यक्ष निर्वाचन के बाद पार्टी के नवनिर्वाचित जिलाध्यक्ष बिंदा चंद्रवंशी पर गंभीर आरोप लगने शुरू हो गए हैं। निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता से लेकर पार्टी विरोधी गतिविधियों तक के आरोपों ने रोहतास जिला की सियासत को गरमा दिया है।
सबसे पहले निर्वाचन प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप सामने आया। जदयू के वरीय नेता डॉ. निर्मल कुमार ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान बिंदा चंद्रवंशी ने पार्टी हितों के विपरीत कार्य किया। उनका कहना है कि डेहरी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से उनकी ही जाति के प्रत्याशी मैदान में थे, जिसके कारण उन्होंने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के बजाय जातीय आधार पर समर्थन किया।
डॉ. निर्मल कुमार के अनुसार, इस मामले की लिखित शिकायत डेहरी विधायक सोनू सिंह द्वारा पार्टी कार्यालय में की गई थी। इसके बावजूद उन्हें जिलाध्यक्ष निर्वाचित घोषित कर दिया गया। आरोप है कि यह निर्णय पार्टी संगठन को कमजोर करने वाला साबित हो सकता है और भविष्य में रोहतास जिले में जदयू को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वहीं, जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष ने भी निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि किसी भी अन्य उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने का अवसर नहीं दिया गया, जिससे नवनिर्वाचित जिलाध्यक्ष को सीधे लाभ पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि यह पूरी प्रक्रिया पूर्व निर्धारित थी और तय कार्यक्रम के तहत बिंदा चंद्रवंशी को जिलाध्यक्ष बनाया गया।
कई अन्य दावेदारों ने भी निर्वाचन को लेकर आपत्ति जताते हुए पुनः चुनाव कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्वाचन के दौरान चुनावी पर्यवेक्षक कहीं नजर नहीं आए, जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। पर्यवेक्षकों की अनुपस्थिति ने आरोपों को और हवा दे दी है तथा पूरी चुनावी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है।
फिलहाल पार्टी की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ है, उससे स्पष्ट है कि रोहतास जिले में जदयू संगठन के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस मामले पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
(रिपोर्ट, तस्वीर: टीपू सुलतान)




