
पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा शुक्रवार को पटना जिले के दुल्हिन बाजार प्रखंड अंतर्गत सिल्हौरी-बिल्हौरी पंचायत के सिल्हौरी गांव में “संतुलित उर्वरक उपयोग एवं प्राकृतिक खेती” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और उसकी संरचना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे जैविक एवं प्राकृतिक उपायों को अपनाकर मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करें और खेती की लागत को कम करें।
इस अवसर पर किसानों के बीच ढैंचा बीज का वितरण किया गया। वैज्ञानिकों ने ढैंचा को हरी खाद के रूप में उपयोग करने के लाभों पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि इसे खेतों में उगाकर मिट्टी में मिलाने से भूमि की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों की निर्भरता कम होती है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष उपाध्याय, प्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग की टीम द्वारा किया गया। इसमें डॉ. रजनी कुमारी (वरिष्ठ वैज्ञानिक), अभिषेक कुमार (प्रक्षेत्र प्रबंधक), प्रेम पाल कुमार सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
कार्यक्रम में कुल 24 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 20 पुरुष एवं 4 महिला किसान शामिल थीं। किसानों को वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के प्रति भी जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित किसानों ने अपने खेतों में संतुलित उर्वरक उपयोग और हरी खाद अपनाने का संकल्प लिया।




