कार्बन फार्मिंग से जलवायु सहनशील कृषि को मिलेगा बढ़ावा : डॉ. बिस्वपति मंडल

पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में बुधवार को आयोजित पाक्षिक संगोष्ठी कार्यक्रम के अंतर्गत “किसानों के लिए कार्बन क्रेडिट: अवसर एवं संभावनाएँ” विषय पर एक संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. बिस्वपति मंडल ने कृषि उत्पादकता, मृदा स्वास्थ्य एवं जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में कार्बन फार्मिंग की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने व्याख्यान में डॉ. मंडल ने कहा कि कार्बन फार्मिंग मृदा स्वास्थ्य सुधारने, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को मजबूत करने तथा कृषि प्रणालियों में कार्बन पृथक्करण बढ़ाकर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की एक प्रभावी रणनीति बनकर उभर रही है। उन्होंने बताया कि अधिक “कार्बन ग्रहण क्षमता” वाली मिट्टी वातावरण से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर उसे संग्रहित करने में सक्षम होती है, जिससे सतत कृषि एवं जलवायु सहनशीलता को बढ़ावा मिलता है।

उन्होंने मृदा जैविक कार्बन संरक्षण एवं दीर्घकालिक उर्वरता बनाए रखने पर विशेष बल देते हुए संरक्षण कृषि को कार्बन तटस्थता प्राप्त करने का टिकाऊ उपाय बताया। उनके अनुसार संरक्षण कृषि से मृदा संरचना में सुधार, जल धारण क्षमता में वृद्धि, जैव विविधता संरक्षण तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी सेवाएँ प्राप्त होती हैं।

डॉ. मंडल ने आंशिक कारक उत्पादकता को पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने और उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने का महत्वपूर्ण संकेतक बताया। साथ ही उन्होंने दीर्घकालिक संरक्षण कृषि प्रणालियों में मृदा सघनता एवं पोषक तत्व स्तरीकरण जैसी समस्याओं के समाधान हेतु सामरिक जुताई को आवश्यक सुधारात्मक उपाय के रूप में रेखांकित किया।

व्याख्यान के दौरान उन्होंने संरक्षण जुताई, फसल अवशेष संरक्षण, कृषिवानिकी, कवर क्रॉपिंग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा विविधीकृत फसल प्रणाली जैसी पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को कार्बन स्थिरीकरण एवं पारिस्थितिकीय संतुलन के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कार्बन फार्मिंग को उभरती कार्बन क्रेडिट प्रणाली से जोड़ते हुए किसानों के लिए इसे आर्थिक रूप से लाभकारी बताया तथा प्रभावी नीतिगत एवं संस्थागत ढाँचे की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने व्याख्यान को अत्यंत ज्ञानवर्धक बताते हुए वैज्ञानिकों से मृदा कार्बन संबंधी अनुसंधानों को और सुदृढ़ करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस. के. पूर्वे, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम. सी. मीणा सहित संस्थान के वैज्ञानिक, कर्मचारी एवं आईएआरआई पटना हब के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रोहन कुमार रमण के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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