डॉ. आशुतोष उपाध्याय की कविता: “अल-नीनो की मार: जल, जमीन और जीवन की व्यथा”

  1. वर्षा और जल उत्पादकता
    रूठेगा गगन जब, अल-नीनो का प्रकोप होगा जारी।
    नहीं बरसेंगे मेघ, सूख जाएँगी जलधाराएँ सारी।
    होगी जल की कमी, घट जाएगी जल-उत्पादकता।
    प्रकृति ने ही डाला है हम पर दुखों का बोझ भारी।
  2. मृदा और भूमि उत्पादकता
    फिर तपेगी धरा, मिट्टी की उड़ जाएगी नमी सारी।
    पड़ जाएँगी दरारें, उपजाऊ शक्ति होगी हारी।
    घटेगी भूमि की उत्पादकता, होगा किसान उदास।
    सूखे दिखेंगे खेत, मानो मरुस्थल की हो क्यारी।
  3. फसल उत्पादन
    बिन पानी मुरझाएँगे धान-मक्का, फसलें होंगी बेहाल।
    अल-नीनो के कहर से टूटेगा अनेक फसलों का हाल।
    उपज में होगी भारी कमी, अन्न का संकट गहराएगा।
    चिंता में डूबेंगे खेत-खलिहान, दुर्दशा होगी विकराल।
  4. पशु स्वास्थ्य
    चारे को तरसेंगे मवेशी, सूखेंगे तलैया-ताल।
    गर्मी के प्रचंड ताप से पशुओं का होगा बुरा हाल।
    तड़पेंगे वे बिन पानी के, घटेगा उनका स्वास्थ्य-स्तर।
    अल-नीनो पशुपालकों को देगी विपदा का जंजाल।
  5. कीमतों में वृद्धि
    घटेगा उत्पादन तो बाजार में मच जाएगा हाहाकार।
    बढ़ेंगी अनाजों की कीमतें, महँगा हो जाएगा संसार।
    दाल और तेल के दाम फिर छूने लगेंगे आसमान।
    महँगाई की मार झेलेगी फिर आम जनता अपार।
  6. पर्यावरण और जल संकट
    गर्मी के प्रचंड ताप से पर्यावरण हो जाएगा त्रस्त।
    गर्म जलाशय, पिघलते ग्लेशियर, और धरा होगी ध्वस्त।
    जीव-जंतु होंगे व्याकुल, छाएगा गहरा जल-संकट।
    बिगड़ेगा प्राकृतिक संतुलन, होंगे सब अस्त-व्यस्त।
  7. मानव जीवन
    लू के थपेड़ों से जनजीवन हो जाएगा लाचार।
    गर्मी बढ़ाएगी मुश्किलें, बिजली-पानी की पड़ेगी मार।
    छाएगा बीमारियों का साया, थकेगी किसान की देह।
    चुनौती भरा होगा हर पल, पर हिम्मत रखना बरकरार।
  8. सामाजिक समरसता
    जल की समय पर उपलब्धता पर और छिड़ेंगे विवाद।
    टूटेगा भाईचारा और समरसता, मन में पनपेंगे अवसाद।
    रूखे-सूखे मौसम की मार से रूठ जाएगी समरसता।
    अभावों के बोझ तले सिमट जाएँगे सारे संवाद।
  9. आर्थिक स्थिति और रोजगार
    रोजगार छिन जाएँगे, कृषि-अर्थव्यवस्था होगी बेहाल।
    दिखेंगे खाली खेत-खलिहान, टूटेंगे खुशियों के जाल।
    बढ़ेगा कर्ज किसानों पर, वे दब जाएँगे बोझ तले।
    आर्थिक मंदी भी बढ़ेगी, साक्षी बनेगा अल-नीनो काल।
  10. नई आशा और समाधान
    तकनीक और जलवायु-अनुकूल खेती का लेना होगा सहारा।
    मोटे अनाज अपनाकर संवर सकता है भविष्य हमारा।
    संकट के इस भीषण दौर में हमें जगानी होगी नई आशा।
    मिलकर करेंगे विपदा का समाधान, यही है संकल्प हमारा।
Share
  • Related Posts

    कविता :सावन की बहार

    सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह की कविता : सावन की बहार सावन की बहार (काव्य तरंग गीत) सावन की बहार, पड़े मखमली फुहार, स्वर्ग-सा सुंदर लगे यह सारा संसार। चारों तरफ…

    Share

    “धरती की पुकार : प्रकृति संग उज्ज्वल कल की ओर” — डॉ. आशुतोष उपाध्याय

    “विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रस्तुत है डॉ. आशुतोष उपाध्याय की पर्यावरण कविता — ‘धरती की पुकार : प्रकृति संग उज्ज्वल कल की ओर।’” (1) पाँच जून दो हज़ार…

    Share

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

    You Missed

    “भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में खोता मानसिक सुकून”

    “भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में खोता मानसिक सुकून”

    जिला स्तरीय कुश्ती में निहाल हुसैन बने विजेता, प्रमंडल प्रतियोगिता के लिए चयन

    जिला स्तरीय कुश्ती में निहाल हुसैन बने विजेता, प्रमंडल प्रतियोगिता के लिए चयन

    मौसम की चुनौती से निपटने को युवाओं को स्मार्ट कृषि का प्रशिक्षण, पटना में तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू

    मौसम की चुनौती से निपटने को युवाओं को स्मार्ट कृषि का प्रशिक्षण, पटना में तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू

    ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारों से गूंजा डेहरी, महागठबंधन ने किया आक्रोश प्रदर्शन

    ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारों से गूंजा डेहरी, महागठबंधन ने किया आक्रोश प्रदर्शन

    रोहतास के विकास को मिली रफ्तार, बाइपास से जाम से राहत; सोन का पानी और नई टाउनशिप की सौगात

    रोहतास के विकास को मिली रफ्तार, बाइपास से जाम से राहत; सोन का पानी और नई टाउनशिप की सौगात

    2030 तक आत्मनिर्भर बिहार का लक्ष्य, युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाने से रोकने पर जोर

    2030 तक आत्मनिर्भर बिहार का लक्ष्य, युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाने से रोकने पर जोर