
सासाराम (रोहतास)। सूर्यपुरा स्थित राजकीय डिग्री महाविद्यालय में शनिवार को आयोजित हिन्दी पखवाड़ा समारोह का समापन हुआ। समारोह में हिन्दी-उर्दू की भाषाई एवं साहित्यिक परंपरा, हिन्दी की महत्ता और संपर्क भाषा के रूप में उसके योगदान पर वक्ताओं ने विचार रखे।
सासाराम के एसपी जैन महाविद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. गुरुचरण सिंह ने कहा कि हिन्दी और उर्दू मूल रूप से एक ही हिंदुस्तानी भाषा की दो अलग-अलग साहित्यिक शैलियां हैं। दोनों में मुख्य अंतर लिपि और शब्दावली का है। उन्होंने कहा कि आम बोलचाल की भाषा में रोजमर्रा के सरल शब्दों का प्रयोग होता है, जिसमें संस्कृत के साथ अरबी-फारसी के सहज शब्द भी शामिल हैं।
वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार सरोज कुमार पंकज ने हिन्दी की महत्ता पर कहा कि हिन्दी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीयों की पहचान और गौरव का प्रतीक है। विभिन्न प्रदेशों और संस्कृतियों के बीच हिन्दी मजबूत संपर्क भाषा की भूमिका निभाती है और लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है।
वीर कुंवर सिंह महाविद्यालय, धारूपुर के हिन्दी विभाग की प्राध्यापिका अनिता सिंह ने भी हिन्दी भाषा की उपयोगिता और महत्व पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अलाउद्दीन अजीजी ने कहा कि 14 सितंबर, 1949 को हिन्दी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया गया। उन्होंने हिन्दी को देश में व्यापक रूप से बोली और समझी जाने वाली भाषा बताया।
समारोह में इंदु-तपेश्वर महिला महाविद्यालय की हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा सिंह, सरोज कुमार पंकज और महाविद्यालय की छात्राओं ने कविताओं की प्रस्तुति दी। इससे कार्यक्रम का माहौल साहित्यिक और जीवंत रहा। महाविद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया, जबकि छात्र-छात्राओं को मेडल प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर कुमार ने किया।
रिपोर्ट, तस्वीर: टिपू सुलतान






