
सासाराम (रोहतास)। कृषि सांख्यिकी से संबंधित आंकड़ों के संग्रहण, संधारण और विश्लेषण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के सभागार में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रभारी जिला पदाधिकारी-सह-उप विकास आयुक्त, रोहतास की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसमें संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को कृषि सांख्यिकी के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए आंकड़ों के संग्रहण में सटीकता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, रोहतास ने कृषि सांख्यिकी के आंकड़ों के संग्रहण और उनके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को समय पर सटीक प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि कृषि सांख्यिकी के आंकड़ों के आधार पर जिले में विभिन्न फसलों के उत्पादन और उत्पादकता का आकलन किया जाता है। इन आंकड़ों की सहायता से फसल बीमा के तहत क्षतिपूर्ति तथा बिहार राज्य फसल सहायता योजना के अंतर्गत किसानों को मिलने वाले अनुदान और सहायता के निर्धारण में भी मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि कृषि सांख्यिकी के आंकड़े सरकार की कृषि संबंधी योजनाओं और नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए आंकड़ों का संग्रहण, संधारण और प्रतिवेदन तैयार करने के दौरान पूरी सावधानी बरतना आवश्यक है। आंकड़ों में शुद्धता रहने से कृषि उत्पादन का सही आकलन करने और किसानों के हित में प्रभावी योजनाएं तैयार करने में सहायता मिलती है।
फसल सर्वेक्षण से लेकर फसल कटनी प्रयोग तक की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला सांख्यिकी कार्यालय, रोहतास के सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी राजेश कुमार एवं अक्षय कुमार दूबे ने कृषि सांख्यिकी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। इसमें फसल क्षेत्र सर्वेक्षण, खेसरा पंजी का संधारण, जिन्सवार एवं द्रुत जिन्सवार, भूमि उपयोग विवरणी, शुद्ध सिंचित विवरणी, प्रक्षेत्र मूल्य, नेत्रांकन विधि, फसल सांख्यिकी सुधार और फसल कटनी प्रयोग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
प्रशिक्षकों ने संबंधित कार्यों की प्रक्रिया और उनके व्यावहारिक महत्व को समझाते हुए बताया कि कृषि क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों का व्यवस्थित संकलन और सही अभिलेखों का संधारण कृषि उत्पादन के विश्वसनीय आकलन के लिए आवश्यक है। इससे फसलों के क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता से संबंधित विवरण तैयार करने में मदद मिलती है।
डिजिटल माध्यमों के उपयोग पर भी जोरकृषि सांख्यिकी से संबंधित कार्यों के प्रभावी निष्पादन के लिए ई-सांख्यिकी पोर्टल, सीसीई एग्रीऐप और डीजीसीईएस ऐप सहित विभिन्न डिजिटल माध्यमों के उपयोग की प्रक्रिया भी समझाई गई। प्रशिक्षण में इन माध्यमों के जरिए कृषि संबंधी आंकड़ों के संग्रहण, प्रविष्टि और प्रतिवेदन तैयार करने की जानकारी दी गई। डिजिटल माध्यमों के समुचित उपयोग से आंकड़ों के संकलन और प्रेषण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।
कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के पदाधिकारी सुमित कुमार, सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी, प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कृषि सांख्यिकी से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ाना और जिले में कृषि संबंधी आंकड़ों के संग्रहण एवं प्रतिवेदन की गुणवत्ता सुनिश्चित करना रहा।





