
डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास )। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, मानसिक समस्याओं की समय पर पहचान करने और जरूरतमंद लोगों को उचित परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 के अवसर पर रोहतास जिले में दो जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के नारायण नर्सिंग कॉलेज के मानसिक स्वास्थ्य नर्सिंग विभाग की ओर से अकोढ़ीगोला प्रखंड के चांदी गांव में जागरूकता अभियान चलाया गया, जबकि डेहरी बाजार के अंबेडकर नगर, बारह पत्थर में नारायण केयर की ओर से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं परामर्श शिविर लगाया गया।
चांदी गांव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नर्सिंग विद्यार्थियों ने जागरूकता रैली निकाली और ‘पागल नहीं, परेशान हैं’ विषय पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर ग्रामीणों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाया। विद्यार्थियों ने घर-घर जाकर मानसिक समस्याओं के शुरुआती लक्षणों, मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और उपलब्ध सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी। इस दौरान जागरूकता संबंधी पर्चे भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम का आयोजन नारायण नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्या प्रो. डॉ. के. लता एवं उप-प्राचार्या प्रो. डॉ. शवेता शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया। मानसिक स्वास्थ्य नर्सिंग विभाग की विभागाध्यक्ष नंदिनी भूमिज के नेतृत्व में कार्यक्रम का सफल संचालन हुआ। इसमें विभाग के शिक्षक मोहित कुमार गुप्ता, हेमंत सिंह एवं नितिश केशरी ने सक्रिय योगदान दिया।
परामर्श शिविर में 100 लोगों ने लिया भाग

दूसरी ओर, डेहरी बाजार के अंबेडकर नगर, बारह पत्थर में नारायण केयर की ओर से आयोजित मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं परामर्श शिविर में लगभग 100 लोगों ने भाग लिया। शिविर में लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं, उनके लक्षणों, देखभाल और उपचार के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।
शिविर का मुख्य उद्देश्य मानसिक समस्याओं के प्रति व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना, शुरुआती लक्षणों की पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा जरूरतमंद लोगों को उचित परामर्श और उपचार की सुविधाओं से जोड़ना था।
इस अवसर पर नारायण केयर के क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट गुलजार अहमद, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. आशीष कुमार, स्पेशल एजुकेटर भास्कर कुमार एवं सेंटर इंचार्ज शिवानी चतुर्वेदी उपस्थित रहे। विशेषज्ञों की टीम ने लोगों को मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
दोनों कार्यक्रमों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। मानसिक परेशानी को कमजोरी या सामाजिक कलंक के रूप में देखने के बजाय, समय पर उसकी पहचान कर उचित परामर्श और उपचार प्राप्त करना जरूरी है। जागरूकता, संवेदनशील व्यवहार और विशेषज्ञों की मदद से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को बेहतर जीवन जीने में सहायता मिल सकती है।





