कॉमर्स में करियर के अनेक विकल्प

कॉमर्स में कॅरियर बनाने के लिए छात्रों के पास विकल्पों की कोई कमी नहीं है। 12वीं के बाद कॉमर्स विषय के छात्र चार्टर्ड अकाऊंटेंट से लेकर कम्पनी सेक्रेटरी जैसे रोजगारपरक कोर्स कर सकते हैं। इंडस्ट्रीयल कॉस्ट एंड वर्क अकाउंट, बीकॉम के साथ कम्प्यूटर अकाउंटिंग, बैंकिंग की परीक्षा तथा बीकॉम के बाद एमबीए तथा ई-कॉमर्स भी करियर के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।
बैचलर ऑफ कॉमर्स : 12वीं के बाद कॉमर्स में 3 वर्षीय ग्रेजुएशन के रूप में बीकॉम एक विकल्प है। इससे अकाउंटिंग फाइनेंस, ऑप्रेशंस, टैक्सेशन और दूसरे कई फील्ड्स में करियर बना सकते हैं। बीकॉम में छात्रों को गुड्स अकाउंटिंग, अकाउंट्स, प्रॉफिट एंड लॉस और कम्पनी कानून की जानकारी दी जाती है।


बीकॉम अकाउंटिंग एंड फाइनेंस : यह 12वीं के बाद किया जाने वाला तीन वर्षीय डिग्री प्रोग्राम है। इस कोर्स के बाद अकाउंट्स तथा फाइनेंस में करियर के मौके काफी हैं। शुरुआती दिनों में बतौर ट्रेनी अकाउंटेंट काम किया जा सकता है। इस प्रोग्राम में अकाउंटस, फाइनेंस, टैक्सेशन के करीब 39 विषय पढ़ाए जाते हैं। इस डिग्री प्रोग्राम में फाइनांशियल नॉलेज पर ज्यादा फोकस किया जाता है।
बीकॉम बैंकिंग एंड इंश्योरेंस : यह एकेडमिक और प्रोफेशनल डिग्री दोनों है। इस प्रोग्राम में अकाउंटिंग, बैंकिंग, इंश्योरेंस, लॉ, बैंकिंग लॉ और इंश्योरेंस रिस्क कवर की जानकारी दी जाती है। इस डिग्री में बैंकिंग तथा इंश्योरेंस इंडस्ट्री में कवर होने वाले टॉपिक्स और विषयों की सिस्टेमेटिक स्टडी कराई जाती है। इस कोर्स में 38 विषय होते हैं। इसके अलावा बैंकिंग और इंश्योरेंस से जुड़े प्रोजेक्ट भी हैं। इस कोर्स को करने के बाद स्टूडेंट एमकॉम, एमबीए, सीएफए जैसे हायर एजुकेशन वाले कोर्सेज कर सकते हैं। गवर्नमेंट और प्राइवेट सेक्टर में ऑडिटिंग, अकाउंटेंसी, बैंकिंग, फाइनांस फील्ड में नौकरी के लिए आवेदन किया जा सकता है।

कॉस्ट एंड वर्क अकाउंटेंट : यह सीए से मिलता-जुलता कोर्स है। द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वक्र्स अकाउंटेंट ऑफ इंडिया कॉस्ट अकाउंटेंसी का कोर्स कराता है। 12वीं के बाद भी छात्र यह कोर्स कर सकते हैं। इसके लिए 12वीं पास छात्रों को पहले फाउंडेशन कोर्स करना होता है। कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों को कॉस्ट अकाउंटेंट और इससे जुड़े पदों पर काम करने का मौका मिलता है। इसके लिए द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया में आवेदन करना होता है। दाखिले के लिए जून और दिसम्बर में प्रवेश परीक्षा होती है। फाउंडेशन कोर्स के बाद इंटरमीडिएट कोर्स करना होता है और फिर सीए की तरह ही फाइनल एग्जाम देकर कोर्स पूरा होता है।
बीकॉम फाइनेंशियल मार्केट : इसमें फाइनेंस, इंवेस्टमेंट, स्टॉक मार्केट, कैपिटल, म्युचुअल फंड के बारे में जानकारी दी जाती है। इस प्रोग्राम में 6 सेमेस्टर होते हैं और कुल 41 विषयों की पढ़ाई की जाती है। इस डिग्री को हासिल करने के बाद ट्रेनी एसोसिएट, फाइनेंस ऑफिसर, फाइनेंस कंट्रोलर, फाइनेंस प्लानर, रिस्क मैनेजमेंट, मनी मार्केट डीलर इंश्योरेंस मैनेजर की नौकरी मिल सकती है।
चार्टर्ड अकाउंंटेंंट : इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया यह कोर्स कराता है। सीए में करियर बनाने के लिए इसकी शुरुआत कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट से होती है, जिसे पास करने के बाद ही छात्र अपने लक्ष्य के पहले पड़ाव को पार कर दूसरे पड़ाव पर पहुंच सकता है। इसमें चार विषयों जैसे अकाउंटिंग, मर्केटाइल लॉ, जनरल इकोनॉमिक्स एवं क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड को शामिल किया जाता है। मान्यता प्राप्त बोर्ड से कॉर्मस स्ट्रीम में 12वीं पास करने के बाद कोई भी छात्र सीए में करियर बना सकता है। कई बार छात्र सीए की दौड़ में भाग लेने के लिए अपनी शुरूआत ग्रेजुएशन के बाद भी करते हैं लेकिन सीए कोर्स की लंबी अवधि के कारण सीए की शुरुआत का सही समय 12वीं पास करने के बाद का ही होता है। इसकी तैयारी के लिए छात्रों को पहले अकाउंटिंग में मजबूत पकड़ बनानी चाहिए। छात्रों में मैनेजमैंट और फाइनेंशियल क्षेत्र में नॉलेज के साथ एक्सपर्ट-व्यू होना जरूरी है।

 

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