शिक्षा प्रणाली को देश की विशाल भाषायी विविधता को प्रतिबिंबित करना चाहिए: डॉ. सुकांत मजूमदार

भारतीय भाषा में पाठ्यपुस्तकों के लेखन पर एक दिवसीय कार्यशाला
  • “अस्मिता” 5 वर्षों में 22 भाषाओं में 22000 पुस्तकें तैयार करेगा
  • बहुभाषा शब्दकोष मल्टीलिंगुअल डिक्शनरी तैयार करेगा
  • अनुवाद क्षमताओं को बढ़ाने के लिए तत्काल अनुवाद का उपाय

नई दिल्ली-कार्यालय । प्रतिनिधिशिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने नई दिल्ली में उच्च शिक्षा के लिए भारतीय भाषा में पाठ्यपुस्तकों के लेखन पर कुलपतियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और भारतीय भाषा समिति (बीबीएस) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के. संजय मूर्ति, भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष प्रो. चामू कृष्ण शास्त्री, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार, 150 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपतिए प्रख्यात शिक्षाविद् और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में डॉ. सुकांत मजूमदार ने विभिन्न उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों के लिए भारतीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री तैयार करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को देश की विशाल भाषायी विविधता को प्रतिबिंबित करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों को उनकी मातृभाषा में ज्ञान प्राप्त हो। उन्होंने ष्विकसित भारतष् के उद्देश्य को पूरा करने में दूरदर्शी नेतृत्व प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। डॉ. मजूमदार ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 देश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण में भाग लेने के लिए प्रेरित करने का आधार तैयार करती है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के कार्यान्वयन का नेतृत्व करने के लिए श्री धर्मेंद्र प्रधान के प्रति आभार व्यक्त किया। डॉ. मजूमदार ने यह भी कहा कि भारतीय भाषाएं राष्ट्र के प्राचीन इतिहास और पीढ़ियों से चली आ रही बुद्धिमत्ता का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ियों का पोषण किया जाना चाहिए और समृद्ध सांस्कृतिक और भाषायी विरासत में उनके विश्वास को मजबूत किया जाना चाहिए।

सत्र के दौरानए प्रो. चामू कृष्ण शास्त्री ने भारतीय भाषा संबंधी इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और श्री एम. जगदीश कुमार ने कुछ मूल्यवान जानकारी साझा की। श्री के. संजय मूर्ति ने समापन सत्र के दौरान तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शुभारंभ किया। ये थीं अस्मिता ;अनुवाद और अकादमिक लेखन के माध्यम से भारतीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री का संवर्धनद्धय बहुभाषा शब्दकोषय और तत्काल अनुवाद के उपाय। श्रोताओं को संबोधित करते हुएए श्री मूर्ति ने कहा कि इन सभी परियोजनाओं को आकार देने में प्रमुख भूमिका प्रौद्योगिकी की होगीए और एनईटीएफ और बीबीएस की इसमें बहुत बड़ी भूमिका होगी। यूजीसी के नेतृत्व में भारतीय भाषा समिति के सहयोग से अस्मिता का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 22 अनुसूचित भाषाओं में 22000 पुस्तकें तैयार करना है। भारतीय भाषा समिति के सहयोग से केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) के नेतृत्व में बहुभाषा शब्दकोष बहुभाषी शब्दकोशों का एक विशाल भंडार बनाने की एक व्यापक पहल है। भारतीय भाषा समिति के सहयोग से राष्ट्रीय शिक्षा प्रौद्योगिकी मंच (एनईएफटी) के नेतृत्व में तत्काल अनुवाद के उपायए भारतीय भाषा में तत्काल अनुवाद क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक तकनीकी ढांचे के निर्माण की सुविधा प्रदान करेगी। कार्यशाला में देश भर से 150 से अधिक कुलपतियों ने भाग लिया। कुलपतियों को 12 मंथन सत्रों में बांटा गया थाए जिनमें से प्रत्येक 12 क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों की योजना बनाने और विकसित करने के लिए समर्पित था। प्रारंभिक फोकस भाषाओं में पंजाबी, हिन्दी, संस्कृत, बंगाली, उर्दू, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, तमिल, तेलुगु और ओडिया शामिल थीं। समूहों की अध्यक्षता नोडल विश्वविद्यालयों के संबंधित कुलपतियों द्वारा की गई और उनके विचारविमर्श से बहुमूल्य परिणाम सामने आए। चर्चाओं से मुख्य निष्कर्ष भारतीय भाषा में नई पाठ्यपुस्तकों के निर्माण को परिभाषित करनाए पुस्तकों के लिए 22 भारतीय भाषाओं में मानक शब्दावली स्थापित करना और वर्तमान पाठ्यपुस्तकों के लिए संभावित सुधारों की पहचान करनाए घटकों में से एक के रूप में भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) पर जोर देनाए व्यावहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान को जोड़ना शामिल था। एक प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गयाए जिसके दौरान पैनल द्वारा प्रश्नों के उत्तर दिए गए।

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