महिला कृषकों के सशक्तिकरण पर जोर, पटना कृषि अनुसंधान परिसर में महिला दिवस कार्यक्रम

  • ज्ञान साझा करने, क्षमता विकास और संस्थागत सहयोग के माध्यम से महिला किसानों को सशक्त बनाने पर चर्चा

पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस–2026 के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के प्रति सम्मान प्रकट करना तथा कृषि एवं समाज में उनके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करना था। इस वर्ष कार्यक्रम का आयोजन “दान करके लाभ प्राप्त करें” थीम के अंतर्गत किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य ज्ञान साझा करने, क्षमता विकास और संस्थागत सहयोग के माध्यम से महिला कृषकों को सशक्त बनाना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनका सशक्तिकरण सतत कृषि विकास तथा पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से महिला किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ उनके परिवार के जीवन स्तर में भी सुधार संभव है।डॉ. उपाध्याय ने अन्नदान, विद्यादान, औषधिदान और अभयदान जैसे चार प्रकार के दानों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन दानों के माध्यम से व्यक्ति को मानसिक शांति, संतुष्टि और आत्मगौरव की अनुभूति होती है तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद मिलती है।

इससे पहले प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी ने स्वागत भाषण देते हुए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व और कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। वहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. धीरज कुमार सिंह ने महिला कृषकों के उत्थान में संस्थान की विभिन्न पहलों—कौशल विकास, प्रौद्योगिकी प्रसार और आजीविका उन्नयन—की जानकारी दी।

कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. कुमारी शुभा ने “होमस्टेड फार्मिंग एवं पोषण वाटिका के माध्यम से पोषण जागरूकता” विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि घर के आसपास विकसित पोषण वाटिकाएँ परिवार के पोषण स्तर में सुधार और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। वहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रजनी कुमारी ने पशुपालन के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार साझा किए और बताया कि छोटे पशुधन आधारित उद्यम ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।

इस दौरान कृषि कार्यों में सक्रिय महिलाओं की समस्याओं और उनके संभावित समाधान पर एक तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया, जिसका संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनिर्बन मुखर्जी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पुष्पनायक ने “बेहतर भविष्य के लिए कृषि में महिला सशक्तिकरण” विषय पर व्याख्यान देते हुए महिला किसानों के लिए संस्थागत सहयोग और निरंतर क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान महिला कृषकों को कृषि इनपुट और वेलनेस किट का वितरण भी किया गया, जिसमें दैनिक उपयोग की वस्तुओं के साथ ग्रीष्मकालीन सब्जियों के बीज किट शामिल थे। साथ ही महिला कृषकों से कृषि प्रौद्योगिकी और प्रसार सेवाओं से जुड़े उनके अनुभव और सुझाव भी प्राप्त किए गए।

इस अवसर पर महिला कृषकों ने लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं, जिससे कार्यक्रम में ग्रामीण संस्कृति की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम के अंत में डॉ. रचना दूबे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

अपराह्न सत्र में महिला कृषकों को संस्थान की विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने कृषि से संबंधित नई प्रौद्योगिकियों और पोषण आधारित इकाइयों के बारे में जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में कुल 208 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें बिहार और झारखंड से आई 140 महिला कृषक शामिल थीं।

संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने अपने संदेश में सभी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य को महिला कृषकों की सक्रिय भागीदारी और सशक्तिकरण के बिना हासिल नहीं किया जा सकता।

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