पटना/नई दिल्ली। पत्रकारिता की विश्वसनीयता और पेशेवर मानकों को बनाए रखने के लिए पत्रकारों का प्रशिक्षण, सत्यापन और नैतिक प्रतिबद्धता आवश्यक है। इसी बीच, पत्रकारिता के नाम पर कथित वसूली और फर्जी प्रेस पहचान-पत्रों के इस्तेमाल को लेकर सामने आई एक वीडियो रिपोर्ट ने मीडिया जगत में नई बहस छेड़ दी है। इस परिप्रेक्ष्य में वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूजेएआई) की ओर से स्वच्छ छवि वाले और जिम्मेदार पत्रकारों को संगठन से जोड़ने तथा उनके कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है।
ग्लोबल भारत की एक वीडियो रिपोर्ट में कुछ वेबसाइटों के माध्यम से प्रेस आईडी कार्ड, ऑनलाइन प्रोफाइल, सदस्यता और पत्रकारिता से जुड़ी अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर कथित तौर पर पैसे वसूलने के मामले उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन सुविधाओं के लिए 599 रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक की कीमत बताई जाती है। रिपोर्ट में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों से बातचीत और संबंधित गतिविधियों के दृश्य भी दिखाए गए हैं।
वीडियो रिपोर्ट में एक बड़े मीडिया हाउस के हवाले से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रेस आईडी लेकर घूम रहे कुछ लोगों की गतिविधियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि कुछ लोग विवादित सूचनाओं के प्रसार और लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
पत्रकारिता की गरिमा और प्रशिक्षण जरूरी
पत्रकारिता केवल पहचान-पत्र हासिल करने तक सीमित नहीं है। इसमें तथ्य-जांच, समाचार लेखन, रिपोर्टिंग, नैतिक जिम्मेदारी और कानून की समझ महत्वपूर्ण होती है। बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और पेशेवर समझ के पत्रकारिता करने से मीडिया की साख प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्ट में कुछ सोशल मीडिया पेजों और न्यूज वेबसाइटों के आंदोलनों से ठीक एक-दो दिन पहले बनाए जाने का दावा भी किया गया है। ऐसे मामलों में संबंधित संस्थाओं की पृष्ठभूमि, गतिविधियों और समाचार प्रकाशन की विश्वसनीयता की जांच जरूरी है।
इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद कौशल और राष्ट्रीय कमिटी के सदस्यों ने कहा कि मीडिया संस्थानों, पत्रकार संगठनों और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों को ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इससे पत्रकारिता की गरिमा बनाए रखने और फर्जी पहचान के सहारे लोगों को गुमराह करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
सदस्यता से पहले सत्यापन पर जोर
डब्ल्यूजेएआई का कहना है कि संगठन का उद्देश्य स्वच्छ छवि वाले, जिम्मेदार और पत्रकारिता के प्रति गंभीर लोगों को जोड़ना है। संस्था के अनुसार, सदस्यता देने से पहले आवेदकों की पृष्ठभूमि और संबंधित विवरणों की जांच की जाती है। पुलिस सत्यापन के बाद ही सदस्यों को जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
आवश्यक जांच प्रक्रिया से संतुष्ट होने के बाद ही सदस्यता प्रदान की जाती है और पात्र सदस्यों को प्रेस आईडी कार्ड जारी किया जाता है। संस्था ने सदस्यता के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित किए जाने की भी जानकारी दी है, ताकि पत्रकारिता से जुड़ने वाले लोगों में आवश्यक शैक्षणिक आधार और पेशेवर समझ सुनिश्चित की जा सके।
कार्यशालाओं और प्रशिक्षण से कौशल विकास
डब्ल्यूजेएआई की ओर से समय-समय पर पत्रकारिता से संबंधित कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। इनका उद्देश्य नए और उभरते पत्रकारों को समाचार लेखन, रिपोर्टिंग, डिजिटल पत्रकारिता, तथ्य-जांच, पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों और पेशेवर कार्यप्रणाली की जानकारी देना है।
संस्था नए पत्रकारों को पत्रकारिता के विभिन्न पाठ्यक्रमों के संबंध में सलाह और मार्गदर्शन भी प्रदान करती है। पत्रकारिता का कोर्स करने के इच्छुक सदस्यों को उपलब्ध नियमों और व्यवस्थाओं के अनुसार प्रशिक्षण में रियायत देने का प्रयास किया जाता है, ताकि आर्थिक या जानकारी के अभाव में इच्छुक लोग प्रशिक्षण से वंचित न रहें।
वेब पत्रकारिता के मानकों पर भी जोर
वेब जर्नलिस्ट्स स्टैंडर्ड अथॉरिटी के संबंध में संस्था ने बताया कि यह एसआरबी के रूप में कार्य करती है और डब्ल्यूजेएआई के अंतर्गत अपने सदस्य पोर्टलों की निगरानी करती है। संस्था का उद्देश्य वेब पत्रकारिता में निर्धारित मानकों और पेशेवर जवाबदेही को बढ़ावा देना है।
डब्ल्यूजेएआई का मानना है कि पत्रकारिता में बेहतर प्रशिक्षण, उचित सदस्यता प्रक्रिया और निरंतर सीखने की संस्कृति से ही दक्ष, जिम्मेदार और विश्वसनीय पत्रकार तैयार किए जा सकते हैं। इससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता मजबूत होगी और जनहित में मीडिया की भूमिका अधिक प्रभावी बन सकेगी।




