
आज गुरुवार को हर्षोल्लाष के साथ वेद व्यास की जयन्ती मनाई जा रही है। इस पावन पर्वोत्सव में अपने-अपने गुरु के पूजन करने की सनातन परम्परा है। अपनी गुरु परम्परा के अनुसार गुरुपाद की पूजा की जाती है। जगत के पालन कर्ता भगवान् श्रीमन्नारपण जब आषाढ़ शुक्ल हरि शायिनी एकादशी को शयन करते है तो अगामी चार महिनों के लिए जीव मात्र का पालन करने का सम्पूर्ण भार गुरुदेव पर आ जाता है।
अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान रूपी प्रकाश से अपने शिष्य को जो प्रकाशित करते हैं ‘ उन्हें गुरु कहा गया है। गुरु ही जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कराते हैं। गुरुदेव आचार्य पं. लालमोहन शास्त्री ने कहा कि बिना गुरु के जीवन अधूरा माना गया। श्री कृष्ण द्वयपायन वेद व्यास जी सनातन धर्म का आधार ज्ञानमय प्रदिप को जलाया है। वेद को चार भाग में ऋग्वेद – यजुर्वेद – सामवेद और अथर्व वेद, अठारह पुराण और विशाल ग्रंथ महाभारत को निर्माण किये। इसके ज्ञान के बिना भारतीय संस्कृति सनातन धर्म को समझना सम्भव नही है। इसीलिए वेद व्यास की जयन्ती को गुरु पूजा – गुरु पूर्णिमा के रूप में सनातनी मनाते हैं।
प्रस्तुति : आचार्य पं. लालमोहन शास्त्री






