स्वर्ग जाने की इच्छा रखने के बजाय, क्यों न हम धरती को स्वर्ग बनाए : महर्षि अरविंद

डेहरी-आन-सोन (रोहतास) कार्यालय प्रतिनिधि। पाली रोड स्थित श्री अरविंद सोसाइटी में महर्षि अरविंद के पावन दिव्य देहांश ( रेलिक्स ) के आगमन के आठवें वर्षगांठ पर वरिष्ठ साधक विनय कुमार सिन्हा ने गुरुवार को कहा कि महर्षि अरविंद ने हमेशा शरीर के माध्यम से कर्म को प्रमुखता देने को कहा था। नरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि श्री अरविंद कहते है अपने कर्म में लिप्त होकर तुम साधना कर सकते हो। इसे हर बार सच्चाई के साथ करने के बाद भगवान को समर्पित करने से तुम्हे जीवन का रास्ता मिल जाएगा।

वरिष्ठ साधक विनोद मारोदिया ने दिव्य देहांश पर चर्चा करते हुए कहा कि श्री अरविंद के देहाशं आने का मतलब भौतिक रुप से उनकी सशक्त उपस्थित यहां पर है। उन्होंने कहा कि उनके स्वप्न को चरितार्थ करने के लिए हम सब को सजग रहना है। महर्षि अरविंद ने कभी भी मुक्ति औऱ स्वर्ग पर जाने की परिकल्पना नहीं की। उनके दर्शन में धरती को स्वर्ग बनाने का विजन शामिल है।

वक्ताओं ने कहा कि स्वाधीनता संग्राम में लगातार सक्रिय रहने वाले महर्षि अरविंद ने सदैव उन्नत और विकसित भारत की सोच को सबसे आगे रखा। उनका मानना था कि भारत ने अब तक अपना आखिरी आध्यात्मिक सत्य दुनिया के सामने नहीं रखा है। कार्यक्रम का शुभारंभ भजन व ध्यान से हुआ से कार्यक्रम प्रारंभ किया। सोसाइटी की अध्यक्षा डॉ. ज्योति उपाध्याय ने आगत साधकों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि आज श्री अरविंद के पूर्ण योग, हम मां के सच्चे बालक कैसे बने व श्री अरविंद प्रासंगिकता विषय पर व्याख्यान व प्रश्नोत्तरी का कार्यक्रम हुआ। मौके पर अरविंद कुमार शर्मा, दिनेश प्रसाद, कृष्णा प्रसाद, संगीता सिंह, डॉ. गंगासागर सिंह, नंद किशोर, सरोज चौबे आदि उपस्थित थे।

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