धान-परती भूमि प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत पशु स्वास्थ्य शिविर-सह-जागरूकता अभियान का आयोजन

पटना-कार्यालय प्रतिनिधि। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास (प्रोजेक्ट लीडर) एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार (परियोजना समन्वयक) के तत्वाधान में गया जिले में चलाई जा रही उन्नत कृषि तकनीक द्वारा धान-परती भूमि प्रबंधन परियोजना का मुख्य उद्देश्य धान-परती भूमि में दलहन एवं तिलहन फसलों के द्वारा धान-परती भूमि का प्रबंधन करना एवं किसानों की आय में वृद्धि करना है। इस संबंध में दिनांक 25 नवंबर 2024 को गया जिले के टेकारी प्रखंड के गुलेरियाचक ग्राम में धान-परती भूमि में वैज्ञानिकों की टीम, जिसमें डॉ. राकेश कुमार, वैज्ञानिक (पशु आनुवंशिकी और प्रजनन); डॉ. सुरेन्द्र कुमार अहिरवाल, वैज्ञानिक (मछली संसाधन प्रबंधन) एवं देवेन्द्र मंडल, सहायक प्राध्यापक-सह-कनिष्ठ वैज्ञानिक, डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज शामिल थे, द्वारा अनुसूचित जाति उप परियोजना के तहत पशु शिविर-सह-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को विभिन्न पशु रोगों और निवारक उपायों के बारे में जानकारी देना था। डॉ. राकेश कुमार, वैज्ञानिक (पशु आनुवंशिकी और प्रजनन) ने पशुओं को उनके शरीर में पोषक तत्वों की स्थिति और समग्र स्वास्थ्य में सुधार के लिए पूरक खनिज-विटामिन मिश्रण खिलाने के साथ-साथ नियमित कृमि मुक्ति और टीकाकरण करने की सलाह दी। उन्होंने मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए आवश्यक जैविक उपाय करने पर भी जोर दिया। यंहा के किसानों को उन्नत किस्म के मुर्गी, देसी नस्ल कड़कनाथ मुर्गी, पोल्ट्री फीडर, वाटरर एवं मुर्गी पालन के लिए दिए जाने वाले फीड और पशुओं में होने वाले विभिन्न बीमारियों के बचाव हेतु दवाओं को तकनीकी सहायता के रूप में दिया गया।

इसी क्रम में डॉ. देवेन्द्र मंडल ने सीधी बुआई, धान-परती भूमि में रबी फसल, जैसे चना, सरसों, कुसुम, तोरिया आदि के प्रबंधन के बारे में बताया। डॉ. सुरेन्द्र कुमार अहिरवाल ने मत्स्य पालन हेतु किसानों को जागरूक किया एवं इससे संबंधित विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इस बैठक में किसान शोभा कुमारी, रेखा देवी, इंदु देवी, कुंती देवी, सुनैना देवी, मिठू प्रसाद, सहदेव, दिलीप, महेंद्र राम, रविन्द्र यादव सहित लगभग 55 किसानों ने भाग लिया। प्रगतिशील किसान आशीष कुमार सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र मानपुर, गया का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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