
सासाराम (रोहतास)। शहर की ऐतिहासिक धरती एक बार फिर गुरु वाणी से गूंज उठी। ऐतिहासिक गुरुद्वारा चाचा फग्गुमल साहिब जी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 422वें प्रथम प्रकाश उत्सव पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। श्री अखंड पाठ साहिब जी के भोग के बाद भव्य कीर्तन दरबार, कथा-विचार और सिख इतिहास पर आधारित कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में संगत ने गुरुद्वारा साहिब में माथा टेका और गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्र वाणी का श्रवण किया।
कार्यक्रम में हजूरी रागी जत्था भाई साहब भाई विकास सिंघ, भाई पंकज सिंघ, भाई प्रियांशु सिंघ, भाई संदीप सिंघ, भाई दिलबाग सिंघ, मंदीप कौर और खुशबू कौर ने शब्द-कीर्तन के माध्यम से अपनी हाजिरी भरी। गुरबाणी के शब्दों से पूरा गुरुद्वारा परिसर भक्तिमय हो उठा।
इस अवसर पर भाई साहब ज्ञानी गुरविंदर सिंघ, अमृतसर वाले ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की महान काव्य रचना और उसके ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धन-धन पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज ने दुनिया को ऐसा महान और आलोकित ग्रंथ प्रदान किया, जिसमें विभिन्न जातियों और संप्रदायों से जुड़े संतों एवं सूफी संतों की अमृतमयी वाणी को सम्मानपूर्वक स्थान दिया गया है।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु अर्जुन देव जी ने सभी को समान सम्मान देते हुए गुरु ग्रंथ साहिब जी की रचना की। 1604 ईस्वी में श्री अमृतसर स्थित हरिमंदिर साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रथम प्रकाश किया गया और गुरु जी के अनन्य सेवक बाबा बुड्ढा जी को प्रथम ग्रंथी बनाया गया। आज गुरु ग्रंथ साहिब जी की वाणी का संदेश पूरी दुनिया में मानवता, समानता और भाईचारे का मार्ग दिखा रहा है।
ज्ञानी गुरविंदर सिंघ ने सासाराम के सिख इतिहास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह वही ऐतिहासिक धरती है, जहां नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी ने शब्द का गायन किया था। उनकी वाणी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अंग 1352 पर दर्ज है। गुरु तेग बहादुर जी से जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियों और धरोहरों के कारण सासाराम का स्थान बिहार ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया के सिख इतिहास में विशिष्ट है।
डीएम ने किया गुरु तेग बहादुर जी की धरोहरों का दर्शन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला समाहर्ता दीपक कुमार मिश्रा को सिख मिशन बिहार के ऑनरेरी इंचार्ज सह गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, गुरुद्वारा चाचा फग्गुमल साहिब जी के जत्थेदार सरवजीत सिंघ खालसा ने सासाराम के सिख इतिहास और गुरु तेग बहादुर जी से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी दी।
इस दौरान डीएम को बेर साहिब, शस्त्र साहिब, छोटा दरवाजा साहिब, स्नान चौकी साहिब, खड़ाऊं और सिमरनी माला का दर्शन कराया गया। ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद जिला समाहर्ता को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। वहीं दीपक प्रकाश एवं अरुण कुमार को भी सिरोपा प्रदान कर सम्मानित किया गया।
अपने उद्गार में जिला समाहर्ता दीपक कुमार मिश्रा ने कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें जिला मुख्यालय सासाराम में सेवा देने का अवसर मिला और इस ऐतिहासिक स्थल के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि सैकड़ों वर्ष पुरानी गुरु तेग बहादुर जी की अनमोल धरोहरों को जिस तरह सुरक्षित और सहेजकर रखा गया है, वह सराहनीय है। इसके लिए उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन और सेवाधारियों को हृदय से धन्यवाद दिया।
उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 422वें प्रथम प्रकाश उत्सव पर उपस्थित संगत को बधाई देते हुए कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाएं मानवता, समानता और भाईचारे का संदेश देती हैं।
धर्म प्रचार कमेटी, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, श्री अमृतसर के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न सिख जत्थेबंदियों और प्रमुख सेवादारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम की सफलता में चरणजीत सिंघ, धर्मेंद्र सिंघ, कमलजीत सिंघ, पूर्णिमा कौर, मोहित सिंघ, गुरमुख सिंघ, सम्मी सिंघ, प्रिंस कुमार, दिलीप सिंघ, परमजीत सिंघ, अजीत सिंघ, अमरजीत सिंघ, रविंद्र सिंघ, मेहरबान सिंघ, हरमीत कौर, अनीता कौर, सुनीता कौर, ज्योति कौर, रंजन कौर, खुशबू कौर, बिना कौर और रीना कौर सहित अनेक सेवादारों ने सेवा की।
कार्यक्रम के अंत में हेड ग्रंथी भाई रणजीत सिंघ जी ने सरबत के भले की अरदास की। इसके साथ ही उन्होंने संगत को गुरुपर्व की लख-लख बधाई दी। पूरे कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारा परिसर गुरु वाणी, कीर्तन और श्रद्धालुओं की उपस्थिति से आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर रहा।
- रिपोर्ट, तस्वीर : टिपु सुलतान




